गढ़वा में प्रवासी मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी, श्रम कानून की उड़ रही धज्जियां

Updated at : 30 Mar 2026 9:10 PM (IST)
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गढ़वा में प्रवासी मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी, श्रम कानून की उड़ रही धज्जियां

बिना निबंधन बिना कानूनी प्रक्रिया के गढ़वा से दूसरे राज्यों में ले जाये जा रहे मजदूर

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बिना निबंधन बिना कानूनी प्रक्रिया के गढ़वा से दूसरे राज्यों में ले जाये जा रहे मजदूर पीयूष तिवारी, गढ़वा अकांक्षी जिले में शामिल गढ़वा में मजदूरों के निबंधन से लेकर उन्हें ठेकेदारों के माध्यम से फैक्ट्रियों में काम के लिए ले जाने तक की प्रक्रिया में श्रम कानून की धज्जियां उड़ायी जा रही हैं. इस वजह से मजदूर न तो श्रम विभाग से जुड़े लाभ पा रहे हैं और न ही दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में उन्हें या उनके परिजनों को सहायता राशि मिल पा रही है. दूसरे राज्यों में मजदूर की मौत होने पर शव को घर तक लाने के लिए भी चंदा जमा करना पड़ता है. इस मामले में कंट्रक्शन कंपनी और मजदूर सप्लायर अपना पल्ला झाड़ देते हैं. गढ़वा जिले में लगभग प्रत्येक सप्ताह किसी न किसी मजदूर का शव दूसरे राज्यों से आता है. जिले में मजदूरों के लिए कोई स्थायी रोजगार व्यवस्था या फैक्ट्री नहीं हैं. इस मजबूरी का फायदा उठाकर लेबर सप्लायर (मजदूरों के ठेकेदार) अवैध और गैरकानूनी तरीके से बड़ी संख्या में मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजते हैं. आकलन के अनुसार गढ़वा से 1.20 से 1.30 लाख मजदूर बाहर के राज्यों में काम करने जाते हैं, जिनमें 90 प्रतिशत से अधिक अकुशल मजदूर होते हैं. ये मजदूर मुख्य रूप से सरिया-सेट्रिंग और भवन निर्माण कार्यों में भेजे जाते हैं. इन मजदूरों को भेजने से लेबर सप्लायर को लाखों रूपये की आमदनी होती है. सामान्य प्रायोजन समिति की बैठक में मामला उठ चुका है पिछले सप्ताह गढ़वा में संपन्न हुई सामान्य प्रायोजन समिति की बैठक में इस मामले को उठाया गया और श्रम अधीक्षक को निर्देश दिया गया कि वे लेबर ठेकेदारों की जांच करें कि वे मजदूरों को ले जाने के दौरान तय मजदूरी का भुगतान कर रहे हैं या नहीं. बैठक में मुख्य रूप से एएनजी कंपनी की कार्यप्रणाली की जांच करने का निर्देश दिया गया. सभापति सह विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि एएनजी कंपनी ने गढ़वा में बिना लाइसेंस का कार्यालय खोल रखा है और करीब 10 हजार मजदूरों को बिना निबंधन के दूसरे राज्यों में निर्माण कार्य के लिए भेजा है. सत्येंद्रनाथ तिवारी ने इसकी जांच कर 24 घंटे में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. मात्र 9350 मजदूर ही प्रवासी मजदूर के रूप में निबंधित श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, साल 2010 से अब तक दूसरे राज्य में जाने वाले प्रवासी मजदूरों में मात्र 9350 मजदूरों ने ही निबंधन कराया है. जबकि संगठित क्षेत्र (कंट्रक्शन आदि) में 62,180 मजदूर और असंगठित क्षेत्र में 58,938 मजदूर पिछले करीब 15 सालों से निबंधित हैं. निबंधित मजदूरों को मिलता है लाभ प्रवासी मजदूर यदि श्रम विभाग के पोर्टल पर निबंधन कराते हैं, तो उन्हें मृत्यु या स्थायी अपंगता की स्थिति में दो लाख रूपये मिलते हैं. कार्य के दौरान दुर्घटना में दो अंगों की हानि होने पर दो लाख रूपये, एक अंग की हानि पर एक लाख रूपये और सामान्य मृत्यु की स्थिति में घर तक शव लाने के लिए परिजनों को 50 हजार रूपये तक की राशि मिलती है. मुख्यमंत्री झारखंड अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमित अनुदान योजना के तहत विदेश में प्रवासी मजदूर की मृत्यु होने पर 50 हजार रूपये एकमुश्त परिजनों को दिये जाते हैं. निबंधन न कराने वाले मजदूरों को भी लाभ मिलता है, लेकिन राशि कम होती है. यहां करा सकते हैं अपना निबंधन प्रवासी मजदूर डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.श्रमाधन.झारखंड.गॉव.इन में जाकर अपना निबंधन करा सकते हैं. मजदूर किसी भी प्रज्ञा केंद्र या साइबर कैफे में आधार नंबर, बैंक खाता और मोबाइल नंबर के साथ बायोमैट्रिक लगाकर निबंधन करा सकते हैं. निबंधन होने के बाद मजदूर श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ स्वतः प्राप्त करेंगे. कार्यालय खोलकर मजदूरों को दूसरे राज्य में भेजना गैरकानूनी: श्रम अधीक्षक श्रम अधीक्षक संजय आनंद ने कहा कि मजदूरों का निबंधन कानूनी बाध्यता नहीं है, लेकिन निबंधन कराने पर सरकारी प्रावधानों के अनुसार लाभ मिलता है. उन्होंने बताया कि एएनजी कंपनी का गढ़वा में कार्यालय खोलकर बिना निबंधन मजदूरों को भेजना गैरकानूनी है और इसकी जांच की जायेगी.

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

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