मेदिनीनगर की जीत ने बढ़ाया भानु का कद, भाजपा के लिए बने ''''''''संकटमोचक''''''''

भानु ने पार्टी के भीतर की गुटबाजी को सुलझाकर जीत दिलाने में निभायी महत्वपूर्ण भूमिका
भानु ने पार्टी के भीतर की गुटबाजी को सुलझाकर जीत दिलाने में निभायी महत्वपूर्ण भूमिका वरीय संवाददाता, गढवा निकाय चुनाव परिणामों ने पलामू प्रमंडल की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है. गढवा में भले ही भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा हो, लेकिन मेदिनीनगर नगर निगम में मेयर पद पर अरूणा शंकर को मिली लगातार दूसरी जीत ने न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरा है, बल्कि भवनाथपुर के पूर्व विधायक और भाजपा नेता भानु प्रताप शाही को प्रमंडल के एक कद्दावर रणनीतिकार के रूप में स्थापित कर दिया है. मेदिनीनगर की मेयर सीट पर मिली यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि 2024 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने भाजपा के गढ़ में पलामू में बड़ी सेंधमारी की थी. उस वक्त प्रमंडल की नौ में से चार सीटों पर भाजपा को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी, जिसमें खुद भानु प्रताप शाही और रामचंद्र चंद्रवंशी जैसे दिग्गज अपनी सीटें नहीं बचा पाये थे. इसके बाद भाजपा नेतृत्व ने पलामू प्रमंडल के किले को फिर से मजबूत करने के लिए आत्ममंथन शुरू किया. निकाय चुनाव के ऐलान से पहले ही पार्टी ने पलामू प्रमंडल से सिर्फ भानु प्रताप शाही को राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनाकर यह संकेत दे दिया था कि संगठन अब उनके अनुभव और आक्रामक सांगठनिक क्षमता का उपयोग पूरे पलामू प्रमंडल में करेगा. निकाय चुनाव की घोषणा होते ही पार्टी ने मेदिनीनगर नगर निगम की कमान भानु प्रताप शाही को सौंपी दी. हालांकि, यहां भाजपा समर्थित प्रत्याशी अरुणा शंकर अपने विकास कार्यों के कारण जनता के बीच लोकप्रिय थीं, जिस कारण उनकी चुनावी राह आसान दिख रही थी, लेकिन पार्टी के भीतर की गुटबाजी जीत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा था. मेदिनीनगर में सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय भाजपा विधायक आलोक चौरसिया और मेयर अरुणा शंकर के बीच जमी ””””सियासी बर्फ”””” को पिघलाना था. 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों के रिश्तों में तल्खी इस कदर थी कि इसे पाटना नामुमकिन लग रहा था. लेकिन, भानु प्रताप शाही ने मेदिनीनगर में खुद कैंप किया और अपनी सूझबूझ से न केवल इन दूरियों को कम किया, बल्कि विधायक आलोक चौरसिया को मिशन मोड में चुनावी मैदान में उतार दिया. बागियों में भी दिखा भानु की रणनीति का असर भानु प्रताप शाही ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यक्रमों को सफल बनाने के साथ-साथ बागी तेवर दिखा रहीं जयश्री गुप्ता और मीना गुप्ता को भी चुनावी मैदान से हटाकर पार्टी के पक्ष में किया, जिसमें रघुवर दास ने भी सक्रिय भूमिका निभायी. मेदिनीनगर नगर निगम के मेयर पद पर अरूणा शंकर को मिली जीत ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा के लिए भानु प्रताप शाही अब मैनेजमेंट मास्टर बन चुके हैं.
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