पतियों की लंबी आयु के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला उपवास

Published by : Akarsh Aniket Updated At : 16 May 2026 9:46 PM

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पतियों की लंबी आयु के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला उपवास

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प्रतिनिधि, गढ़वा

जिला मुख्यालय और प्रखंडों में शनिवार को सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए वट सावित्री का व्रत रखा. महिलाएं सुबह से पारंपरिक वेशभूषा और सोलह शृंगार कर अपने-अपने क्षेत्र के वटवृक्ष के नीचे जमा हुईं और विधि-विधान से पूजा की. धूप तेज होने के बावजूद महिलाओं की आस्था में कोई कमी नहीं रही. पूजा स्थलों पर भक्ति गीत और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा.

गढ़वाः अखंड सौभाग्य की कामना के साथ महिलाओं ने की वट सावित्री की पूजा

प्रतिनिधि गढ़वा

गढ़वा में शनिवार को वट सावित्री पूजा श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ की गयी. सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर व्रत रखकर बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना की. सुबह से ही मंदिरों और वट वृक्षों के पास महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी. पूजा स्थलों पर पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं पूजा की थाल लेकर पहुंचीं और विधिवत पूजा संपन्न की.पर्व को लेकर पूरे जिले में धार्मिक और उत्सवी माहौल बना रहा. महिलाओं ने परिवार के साथ पूजा-अर्चना कर सुखमय जीवन की कामना की. महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा की तथा भगवान विष्णु, माता सावित्री और सत्यवान की कथा सुनी. पूजा के दौरान महिलाओं ने परिवार की सुख-शांति और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना की. कई स्थानों पर सामूहिक रूप से पूजा का आयोजन किया गया, इस दौरान कई स्थानों पपर महिलायेंं घर पर ही समूह में बरगद के पौधे को रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना की. वहीं गढ़वा शहर सहित मेराल, मझिआंव, भवनाथपुर, कांडी, रमना, रंका, नगर ऊंटारी, खरौंधी और बिशुनपुरा समेत जिले के विभिन्न प्रखंडों में वट सावित्री पूजा को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया.

पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है व्रत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री व्रत का संबंध माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि सावित्री ने अपने तप, श्रद्धा और दृढ़ संकल्प के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किये थे. तभी से यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है. मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा करने और व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं.

कांडी: सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल पर उमड़ी भीड़

सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी. प्रखंड क्षेत्र में महिलाएं वटवृक्ष के नीचे एकत्र हुईं और पंडितों द्वारा सत्यवान-सावित्री की कथा सुनी. कई महिलाओं ने अपने घर के पास भी वटवृक्ष की पूजा की.

विशुनपुरा: पोखरा चौक विष्णु मंदिर में रही धूम

पोखरा चौक विष्णु मंदिर परिसर में प्रातः काल से ही पूजा के लिए नवविवाहित और सुहागिन महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी. महिलाओं ने निर्जला उपवास रखते हुए वटवृक्ष की परिक्रमा की और सूत बांधकर प्रार्थना की. पंडित त्रिदीप मिश्र ने व्रत कथा सुनायी. मंदिर कमेटी के सदस्य पूजा आयोजन में मददगार रहे.

डंडई: बाजारों में रही रौनक, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा क्षेत्र

डंडई क्षेत्र में महिलाओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की. व्रतधारियों ने फल, फूल, रोली, अक्षत और बांस के पंखे से भगवान विष्णु और वटवृक्ष की पूजा की. बाजारों में फल, फूल और श्रृंगार की दुकानों पर भीड़ देखी गयी.

मेराल: वटवृक्ष में सूत लपेटकर की पतियों की लंबी उम्र की कामना

मेराल में महिलाओं धूमधाम से अपने पति की लंबी उम्र के लिए पूजा-पाठ की. वटवृक्ष के नीचे धूप-दीप जलाकर सूत लपेटा गया. पूजा के बाद पंखे से हवा कर फल और मिठाई पति को खिलायी गयी. इसके बाद महिलाएं पूरे दिन उपवास पर रहती हैं.

रंका: कथा श्रवण कर सुहागिनों ने लिया आशीर्वाद

रांक और आसपास के क्षेत्रों में महिलाएं वटवृक्ष के नीचे सामूहिक पूजा में शामिल हुईं. पंडित देवेंद्र पाठक और लालमोहन पाठक ने सत्यवान-सावित्री की कथा सुनायी. महिलाएं कथा सुनकर आशीर्वाद ग्रहण किया.

रमना: सुहागिनों ने एक-दूसरे को दी बधाई

रमना व ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने एक-दूसरे को अखंड सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद दिया. बाजारों और मंदिर परिसर में सुबह से ही भारी भीड़ रही. महिलाएं अगरबत्ती, दीप, फल, फूल, अक्षत और मिठाई अर्पित कर पति के सुखद जीवन की कामना की. धार्मिक मान्यता के अनुसार वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है. माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाये थे. वटवृक्ष दीर्घायु, स्थिरता और जीवनदायी शक्ति का प्रतीक है और इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश की आराधना से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है.

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