भवन के अभाव में गढ़वा का इकलौता कल्याण गुरुकुल बंद

Published by :Akarsh Aniket
Published at :11 May 2026 9:34 PM (IST)
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भवन के अभाव में गढ़वा का इकलौता कल्याण गुरुकुल बंद

भवन के अभाव में गढ़वा का इकलौता कल्याण गुरुकुल बंद

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विजय सिंह, भवनाथपुर (गढ़वा) गढ़वा जिले के युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी योजना ‘कल्याण गुरुकुल’ प्रशासनिक उदासीनता और जर्जर भवन की भेंट चढ़ गयी है. भवनाथपुर प्रखंड के झगराखाड़ में संचालित जिले का एकमात्र कल्याण गुरुकुल अगस्त 2025 से पूरी तरह बंद हो गया है. इसके बंद होने से प्रशिक्षण ले रहे युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है. साथ ही जिले में बेरोजगारी और पलायन की समस्या फिर से बढ़ने की आशंका गहरा गयी है. वर्ष 2018 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से कल्याण विभाग और एनजीओ ‘पैन आइआिटी रिच फॉर झारखंड फाउंडेशन’ के माध्यम से इस गुरुकुल की शुरुआत की थी. मार्च 2018 से अगस्त 2025 तक इस केंद्र ने कई युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराया. इस दौरान कुल 1644 युवाओं को सरिया मिस्त्री, सेंट्रिंग, मेसन और इलेक्ट्रिशियन जैसे ट्रेडों में प्रशिक्षित कर देश के विभिन्न राज्यों की प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलायी गयी. गुरुकुल का संचालन वर्ष 2004 में बने पुराने एसटी-एससी छात्रावास भवन में किया जा रहा था. लंबे समय तक कस्तूरबा विद्यालय चलने के बाद यह भवन गुरुकुल को सौंप दियमा गया था. समय के साथ भवन पूरी तरह जर्जर हो गया. प्रशिक्षण के दौरान कई बार छात्रों पर छत का प्लास्टर गिरने की घटनाएं भी हुईं, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गये. एनजीओ ने कई बार कल्याण विभाग से भवन की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की. प्रस्ताव लंबित रहने के कारण नहीं हो सका मरम्मत कार्य तत्कालीन उपायुक्त शेखर जमुआर के निर्देश पर विभाग ने 86 लाख रुपये का प्राक्कलन तैयार कर रांची मुख्यालय भेजा, लेकिन प्रस्ताव लंबित रहने के कारण मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका. आखिरकार सुरक्षा कारणों से एनजीओ ने गुरुकुल बंद करने का फैसला लिया. झगराखाड़ कल्याण गुरुकुल से प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को रोजगार के साथ सामाजिक सुरक्षा भी दी जाती थी. सरकार की ओर से 2 लाख रुपये और संबंधित कंपनी की ओर से 5 लाख रुपये का बीमा कराया जाता था. आज यह रोजगार केंद्र पूरी तरह वीरान हो चुका है. क्या कहते हैं पदाधिकारी प्रशिक्षण अधिकारी ब्रजकिशोर ने कहा कि झगराखाड़ कल्याण गुरुकुल जिले के युवाओं के लिए उम्मीद की किरण थी. यहां से सैकड़ों युवा आत्मनिर्भर बने. भवन की जर्जर स्थिति और मरम्मत नहीं होने के कारण इसे बंद करना पड़ा. इससे अब स्थानीय युवाओं के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो गया है.

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