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शिक्षक व बच्चे श्रमदान कर तैयार कर रहे खेल का मैदान

Updated at : 01 Dec 2024 8:31 PM (IST)
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शिक्षक व बच्चे श्रमदान कर तैयार कर रहे खेल का मैदान

शिक्षक व बच्चे श्रमदान कर तैयार कर रहे खेल का मैदान

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रंका. चिनिया प्रखंड के बरवाडीह उत्क्रमित उच्च विद्यालय में खेल का मैदान नहीं होने से बच्चों को खेलकूद में काफी परेशानी हो रही है. यहां के बच्चे खुद ही छोटा ग्राउंड तैयार कर किसी तरह खेलते हैं. खेल शिक्षक आलोक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जब वर्ष 2019 में इस विद्यालय में उनका पदस्थापन हुआ, तब विद्यालय चारों तरफ से छोटे-बड़े चट्टानों से घिरा था. विद्यालय के सामने भी मिट्टी और चट्टानें दिखाई दे रही थी. बच्चों के लिए प्रार्थना व खेलने की जगह नहीं थी. उन्होंने बताया कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ कृष्ण कुमार यादव के सहयोग से सभी शिक्षक संजय कुमार मेहता, दिलीप कुमार रविदास, विपिन किशोर मिंज, सतीश प्रसाद गुप्ता, मनोज प्रसाद व विद्यालय के छात्र-छात्राओं की मदद से चट्टान व मिट्टी काटकर खेल का मैदान तैयार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि दोपहर लंच के बाद अपराह्न एक बजे तक सभी शिक्षक व बच्चे श्रमदान कर चट्टान व मिट्टी काटकर हटा कर मैदान तैयार कर रहे हैं. अभी यहां एक छोटा मैदान बना लिया गया है. यहीं बच्चों को फुटबॉल, बॉलीबॉल, बैडमिंटन, खो-खो व कबड्डी सहित अन्य खेल सिखाये जा रहे हैं. राज्य स्तर तक के खेल में मेडल जीत चुके : खेल शिक्षक ने बताया कि विद्यालय के बच्चे प्रखंड व जिला से लेकर राज्य स्तर तक खेल प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं. राज्य स्तर तक के खेल में मेडल भी जीत चुके हैं. प्रधानाध्यापक ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2019 में विद्यालय में योगदान दिया था. तब उबड़-खाबड़ जगह पर विद्यालय भवन बना कर छोड़ दिया गया था. यहां आने के बाद विद्यालय में कई बदलाव हुए हैं. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों को अनुशासन में रहना, शारीरिक, बौद्धिक व कंप्यूटर शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है. ताकि बच्चों को आगे की पढ़ाई में कोई परेशानी न हो. सभी समय पर विद्यालय आते हैं : प्रधानाध्यापक ने कहा कि सभी शिक्षक व बच्चे समय पर विद्यालय आते हैं. शिक्षक भी कड़ी मेहनत कर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने से कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे. उन्होंने कहा कि यहां का मैट्रिक परीक्षाफल भी शत-प्रतिशत रहता है. विद्यालय परिसर में बागवानी के लिए हाउस बनाया गया है. एक हाउस में दो दर्जन बच्चे-बच्चियां शामिल हैं, जो विभिन्न प्रकार के फूल-पौधे लगा रहे हैं. प्रधानाध्यापक ने कहा कि वह अपने विद्यालय को जिले में नंबर वन विद्यालय बनाना चाहते हैं. ताकि इस विद्यालय का नाम राज्य स्तर तक पहुंच सके. मुखिया व पूर्व मंत्री ने पहल नहीं की : प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय की भूमि समतल कर ग्राउंड बनाने के लिए स्थानीय मुखिया व पूर्व मंत्री को कई बार कहा गया था. लेकिन अब तक उनके स्तर से कोई पहल नहीं की गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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