गायत्री परिवार के प्रबंध ट्रस्टी का निधन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Feb 2016 12:30 AM (IST)
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गढ़वा : अखिल विश्व गायत्री परिवार के गढ़वा जिला के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी विश्वनाथ उपाध्याय (75) का सोमवार को मुगलसराय व मिर्जापुर के बीच यात्रा के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. उनके निधन की खबर मिलते ही गायत्री परिवार सहित जिले के बुद्धिजीवियों में शोक है. दिवंगत उपाध्याय का अंतिम संस्कार […]
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गढ़वा : अखिल विश्व गायत्री परिवार के गढ़वा जिला के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी विश्वनाथ उपाध्याय (75) का सोमवार को मुगलसराय व मिर्जापुर के बीच यात्रा के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया.
उनके निधन की खबर मिलते ही गायत्री परिवार सहित जिले के बुद्धिजीवियों में शोक है. दिवंगत उपाध्याय का अंतिम संस्कार सोमवार को वाराणसी के मर्णकर्णिका घाट पर किया गया. समाचार के अनुसार श्री उपाध्याय अपना पोता राम कुमार उपाध्याय को इलाज के लिए ट्रेन से बेंगलुरु जा रहे थे. इसी बीच मुगलसराय व मिर्जापुर स्टेशन के बीच सोमवार को प्रात: 3.30 बजे चलती ट्रेन में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. मिर्जापुर स्टेशन पर दिवंगत उपाध्याय के पार्थिव शरीर को उतारा गया.
इसकी सूचना मिलते ही दिवंगत उपाध्याय के पुत्र पत्रकार विवेकानंद उपाध्याय सहित घर के सभी परिजन व गायत्री परिवार के जिला समन्वयक विनोद पाठक, बनारसी पांडेय, ललसू राम, अजीत चौबे, पंकज गुप्ता व रजनीश कुमार मंगलम कई पदाधिकारियों ने मिर्जापुर और फिर वहां से बनारस पहुंच कर अंतिम संस्कार में भाग लिया.
वर्ष 2005 में शिक्षक के पद से हुए थे सेवानिवृत्त : जानकारी के अनुसार गढ़वा प्रखंड के करूआकला गांव निवासी दिवंगत विश्वनाथ उपाध्याय वर्ष 2005 में मेराल प्रखंड के ओखरगाड़ा मवि से प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे.
सेवानिवृत्त होने के बाद वे पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों से प्रभावित होकर वर्ष 2006 में गायत्री परिवार की दीक्षा ली थी. इसके बाद से लगातार वे गायत्री परिवार के लिए कार्य करते रहे. दिवंगत उपाध्याय अपने पीछे तीन पुत्र व भरापूरा परिवार छोड़ गये हैं.
वर्ष 2006 में गायत्री परिवार की ली थी दीक्षा
जिला समन्वयक विनोद पाठक ने वाराणसी से टेलीफोन पर बताया कि विश्वनाथ उपाध्याय ने वर्ष 2006 में गढ़वा में आयोजित 24 कुंडीय महायज्ञ में गायत्री परिवार की दीक्षा ग्रहण की थी.
तब उन्हें सहायक प्रबंध ट्रस्टी बनाया गया था. लेकिन, गायत्री परिवार में उनके समर्पण व लगन को देखते हुए उन्हें मुख्य प्रबंध ट्रस्टी की जिम्मेवारी सौंपी गयी थी. वे गायत्री परिवार को मजबूत करने के साथ-साथ कर्मकांड में भी उन्हें महारत हासिल थी. उन्होंने बताया कि वे गायत्री परिवार के रीढ़ थे. उनके निधन से गायत्री परिवार को अपूर्णनीय क्षति हुई है.
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