10 राष्ट्रीय लोक अदालत में 7.24 लाख मामलों का हुआ निष्पादन

Published by : Akarsh Aniket Updated At : 22 May 2026 9:56 PM

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10 राष्ट्रीय लोक अदालत में 7.24 लाख मामलों का हुआ निष्पादन

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पीयूष तिवारी, गढ़वा एक तरफ अदालतों में मामले फाइलों के तले दबे रहते हैं और लोगों को न्याय पाने के लिए बार-बार तारीखों का इंतजार करना पड़ता है. लेकिन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित स्थायी लोक अदालत इस स्थिति को सुधारने में अहम भूमिका निभा रही है. गढ़वा जिले में साल में चार बार यानी हर तीन महीने में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है. इन अदालतों में मामलों के निष्पादन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. 2024, 2025 और 2026 में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालतों 10 राष्ट्रीय लोक अदालतों में कुल 7,24,272 मामले निष्पादित किये गये. इनमें से 7,04,826 मामले प्री-लिटिगेशन के थे. इस दौरान विभागों की मदद से सुलह-समझौते के जरिए 114.3 करोड़ रुपये की राशि सेटल की गयी. आंकड़े बताते हैं कि दिन-ब-दिन लोक अदालतों में निष्पादित मामलों और सेटलमेंट से प्राप्त राशि बढ़ती जा रही है. नौ मार्च 2024 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 6,353 पेंडिंग और प्री-लिटिगेशन मामले निष्पादित किये गये थे. लेकिन हाल ही में नौ मई 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,39,439 मामले निष्पादित किये गये. यह दर्शाता है कि दो सालों में जागरूकता इतनी बढ़ी कि एक बार में 1.30 लाख से अधिक मामले निपटाये गये.

क्या है लोक अदालत

राष्ट्रीय लोक अदालत भारत में विवादों को आपसी सुलह-समझौते से निपटाने का वैकल्पिक मंच है. इसका शाब्दिक अर्थ लोगों की अदालत है. इसमें अदालत में चल रहे या प्री-लिटिगेशन के ऐसे मामले शामिल होते हैं जिन्हें दोनों पक्षों की सहमति से सुलझाया जा सकता है. इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करना है. गढ़वा जिले में लोक अदालत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा स्थायी रूप से संचालित होती है. इसके अलावा साल में चार बार राष्ट्रीय लोक अदालत भी आयोजित की जाती है, जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी भी शामिल रहते हैं. वे न्यायालय में चल रहे वादों का सुलह-समझौते के जरिए निष्पादन करते हैं. इससे वादी और प्रतिवादी दोनों समय और आर्थिक नुकसान से बचते हैं.

इन मामलों का होता है निष्पादन

लोक अदालत में उन सभी मामलों का निष्पादन किया जाता है जो सुलह-समझौते से हल किये जा सकते हैं. इनमें बैंक, बिजली विभाग, राजस्व विभाग, श्रम विभाग, खनन विभाग, एसडीओ कोर्ट, सर्टिफिकेट केस, परिवहन विभाग, भूमि विवाद, शादी-विवाह से जुड़े विवाद, एनआइ एक्ट, नगर पालिका से संबंधित बकाया मामले, वाटर बिल और अन्य सेवा क्षेत्र के विवाद शामिल हैं. इसके अलावा अन्य विभागों के सुलहनिय मामले और निलामवाद से जुड़े मामलों का भी निष्पादन होता है.

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