बाल मजदूरी के खिलाफ दावे बड़े-बड़े, पर हकीकत कुछ और

20जीडब्लूपीएच5-सड़क पर गिट्टी भरते बच्चेहेडलाइन…नामांकन स्कूल में, काम सड़क पर प्रतिनिधि, रंका (गढ़वा).श्रम विभाग ने बाल मजदूरी के खिलाफ कानून बना रखा है. शिक्षा विभाग बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए ढिंढोरा पीट रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में ये सारे दावे खोखले दिखाई पड़ते हैं. गांवों में अभी भी बाल मजदूरी बदस्तूर जारी है. […]
20जीडब्लूपीएच5-सड़क पर गिट्टी भरते बच्चेहेडलाइन…नामांकन स्कूल में, काम सड़क पर प्रतिनिधि, रंका (गढ़वा).श्रम विभाग ने बाल मजदूरी के खिलाफ कानून बना रखा है. शिक्षा विभाग बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए ढिंढोरा पीट रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में ये सारे दावे खोखले दिखाई पड़ते हैं. गांवों में अभी भी बाल मजदूरी बदस्तूर जारी है. फिलवक्त बुढ़ापरास से बांदू तक पथ कालीकरण में काफी संख्या मंे बाल मजदूर भी काम कर रहे हैं. गरीब घर से आनेवाले इन सभी बच्चों का नाम सरकारी स्कूलों में नामांकित है. लेकिन ये बच्चे स्कूल जाने की बजाय गांव में सड़क निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे हैं. सड़क के संवेदक द्वारा इस सड़क पर गिट्टी-मोरम बिछाने का काम ठेका पर दे दिया गया है. इस कार्य में कई स्कूली बच्चे लगे हुए हैं. गिट्टी-मोरम बिछाने में लगे छात्र सोमर मांझी, संतोष सिंह, फूलेश्वर सिंह, फूलकुमारी, प्रतिमा कुमारी आदि ने बताया कि 100 फीट दूरी तक बिछाने का काम करने पर 800 रुपये मजदूरी मिलती है. इसी में वे सब आपस में बांट लेते हैं. काफी गरीब परिवार से आनेवाले इन बच्चों को दो जून की रोटी के लिए भी तरसना पड़ता है. इसके कारण ये अपना विद्यालय छोड़ कर मजदूरी कर रहे हैं.जांच कर कार्रवाई करेंगे : एसडीओइस संबंध में एसडीओ अमित प्रकाश ने कहा कि संवेदक द्वारा बच्चों से कार्य कराना बड़ा अपराध है. इसकी जांच कर वे कार्रवाई करेंगे.
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