हेडलाइन....सतना में बंधक हैं 25 मजदूर

Published at :16 Oct 2014 11:03 PM (IST)
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हेडलाइन....सतना में बंधक हैं 25 मजदूर

फ्लैयर….एक मजदूर भाग कर वापस भवनाथपुर पहुंचा, आपबीती सुनायीप्रतिनिधि, भवनाथपुर (गढ़वा). झारखंड एवं बिहार के करीब 25 मजदूरों का मध्य प्रदेश के सतना में एक कालीन उद्योग में पिछले 20 वर्ष से बंधक बनाये जाने का समाचार है. इसमें गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड के भी तीन मजदूर शामिल हैं. इसमें से एक मजदूर के […]

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फ्लैयर….एक मजदूर भाग कर वापस भवनाथपुर पहुंचा, आपबीती सुनायीप्रतिनिधि, भवनाथपुर (गढ़वा). झारखंड एवं बिहार के करीब 25 मजदूरों का मध्य प्रदेश के सतना में एक कालीन उद्योग में पिछले 20 वर्ष से बंधक बनाये जाने का समाचार है. इसमें गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड के भी तीन मजदूर शामिल हैं. इसमें से एक मजदूर के वहां से किसी तरह भाग कर घर पहुंचने पर इसका खुलासा हुआ है. भवनाथपुर प्रखंड के चेरवाडीह गांव का बिरझु चेरो का पुत्र बितन चेरो तीन साल पहले ही वहां से किसी तरह भाग निकलने में सफल रहा. लेकिन वहां से भागने में गिर कर उसका माथा फट गया और पैर भी टूट गया. इसके कारण वह घर लौटने पर तीन साल तक इलाजरत रहा. स्वस्थ होने के बाद उसने कालीन उद्योग में बंधक बने मजदूरों के विषय में जानकारी दी. इसके बाद जिप सदस्य उमेंद्र यादव ने बितन को लेकर पलामू सांसद वीडी राम से मिलवाया और सभी बंधकों को सतना से छुड़वाने का आग्रह किया. इसके बाद सांसद ने इस संबंध में कार्रवाई के लिए प्रशासन को लिखा है. कालीन उद्योग में बंधक हैं मजदूरबितन चेरो ने बताया कि उसे रोहनिया गांव के रामप्रीत पासवान ने 13 वर्ष की उम्र में ले जाकर उत्तर प्रदेश के गोपीचंद के बराहीपुरा में एक कालीन उद्योग में ले जाकर काम दिलवाया था. वह सजावल सिंह का कालीन उद्योग था. वहां 15 दिन काम करने के बाद उसे रामप्रीत ने मध्य प्रदेश के सतना जिला के कच्छा गांव में मोझा सिंह के हाथों बेंच दिया. वहां उसके साथ दो और लोगों को भी मोझा सिंह से बेचा गया था. उसकी आंखों के सामने ही मोझा सिंह ने रामप्रीत से पैसा का लेन-देन किया. वहां मोझा सिंह के अंडरग्राउंड मकान में चल रहे कालीन उद्योग में उसे लगाया गया. वहां पहले से दो दर्जन लोग काम कर रहे थे, जहां उसे मालूम हुआ कि ये लोग काफी वर्षों से यहां बंधक बने हुए हैं. बितन ने बताया कि वहां मजदूरों को 24 घंटे में मात्र एक बार खाना दिया जाता है. काम में आनाकानी करने पर मजदूरों के साथ मारपीट की जाती थी. फैक्टरी से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी. इस दौरान वहां दो बच्चे बीमार पड़ने पर दवा के अभाव में मर गये. मरने पर उनके शव को लावारिस कह कर फेंक दिया गया. बितन ने कहा कि इसके बाद से ही वह वहां से भागने का अवसर देख रहा था और एक दिन किसी तरह भाग गया. भागने के बाद वह काफी दिनों के भटकने के बाद किसी तरह घर पहुंचने में सफल रहा.भवनाथपुर के और दो लोग हैं बंधकबितन ने बताया कि भवनाथपुर के मकरी गांव को श्रवण साव और धनीमंडरा का अजय बियार अभी भी उसी कालीन उद्योग में बंधक हुआ है. वह वहां से कब से भागने के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन इसमें वे सफल नहीं हो पाये हैं. श्रवण राम के परिजनों ने बताया कि 20 साल पूर्व उसका बेटा कमाने के लिए कह कर 12 साल की उम्र में गया था, लेकिन आज तक न लौट कर आया और न ही कोई खबर भेजी है. इसी तरह अजय बियार के बड़े भाई उमेश बियार ने कहा कि अजय वर्ष 2001 में कमाने गया था, लेकिन आज तक घर नहीं लौटा. टीम बना कर जांच का निर्देश दियासूचना मिलने के बाद गढ़वा एसपी सुधीर कुमार झा ने बितन को बुला कर उससे जानकारी ली. इसके बाद उन्होंने भवनाथपुर थाना प्रभारी संजीव कुमार तिवारी को एक टीम बनाकर इसकी जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. पिता ने सौंपा था बितन को : रामप्रीत इस संबंध में बितन को ले जाकर बेचने का आरोपी रामप्रीत पासवान ने कहा कि बितन के पिता ने ही उसे कुछ काम दिलाने हेतु उसके पास सौंपा था. लेकिन उसने बितन को जहां काम दिलवाया, वहां से 15 दिन में ही भाग गया.

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