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बासगीत पर्चा के लिए ग्रामीण परेशान

Updated at : 31 Jan 2019 12:31 AM (IST)
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बासगीत पर्चा के लिए ग्रामीण परेशान

अधिकारियों ने गांव पहुंच कर ग्रामीणों से जानकारी ली मेराल : मेराल प्रखंड के भीमखांड़ गांव में निवास करने वाले अनुसूचित जाति परिवार के लोग पिछले काफी दिनों से बासगीत पर्चा लेने के लिए परेशान हैं. इन परिवारों को सरकार के नियमों के कारण बासगीत का पर्चा नहीं मिल पा रहा है. विदित हो कि […]

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अधिकारियों ने गांव पहुंच कर ग्रामीणों से जानकारी ली

मेराल : मेराल प्रखंड के भीमखांड़ गांव में निवास करने वाले अनुसूचित जाति परिवार के लोग पिछले काफी दिनों से बासगीत पर्चा लेने के लिए परेशान हैं. इन परिवारों को सरकार के नियमों के कारण बासगीत का पर्चा नहीं मिल पा रहा है. विदित हो कि सरकारी नियमों के प्रावधानों के अनुरूप आदिवासियों को वन भूमि का पट्टा देने का प्रावधान है.
जबकि अनुसूचित जाति के लिए कम से कम 75 वर्षों से रहने का प्रमाण होना चाहिए. ऐसा नहीं होने के कारण प्रशासन भी उन्हें भूमि पट्टा देने से असमर्थ है. यद्यपि स्थानीय राजनीतिक दल के लोग चाहते हैं कि 1000 से ऊपर की जनसंख्या में रहनेवाले अनुसूचित जाति को भूमि में रहने का पट्टा मिल जाये. लेकिन केंद्र सरकार के नियमों के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है.
भीमखांड़ में सैकड़ों एकड़ भूमि में 1000 जनसंख्या से ऊपर अनुसूचित जाति के लोगो को 115 मिट्टी का घर बना हुआ है, जहां वे काफी वर्षों से रहते आ रहे हैं. इनके पास भूमि का पर्चा नहीं होने के कारण अक्सर वन विभाग द्वारा नोटिस देकर उन्हें भूमि खाली करने की बात कही जाती है. इस मामले में बुधवार को उप विकास आयुक्त गढ़वा के निर्देश पर अंचलाधिकारी राकेश सहाय एवं बीडीओ मनोज कुमार तिवारी ने मौके पर पहुंच कर लोगों के बीच बैठ कर मामले की जानकारी ली.
इसमें पाया गया कि गांव का निवासी भुइयां जाति के लोग व कुछ घर पिछड़ी जाति(कहार) के लोग पिछले 30 वर्षों से यहां रहते हैं. ये लोग कानूनी मापदंड से वनभूमि का पट्टा देने के नियम से दूर हैं. इसके लिए उन्हें सरकारी नियमानुसार 75 वर्ष का निवासी होना चाहिए. जबकि आदिवासी परिवार को तुरंत पट्टा देने का प्रावधान है.
दोनों अधिकारियों ने मौके पर उपस्थित ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्या से वे लोग जिले के वरीय अधिकारियों को तत्काल अवगत करायेंगे. इस अवसर पर जगदीश राम, रामधारी राम, ललन राम, छोटन राम, लक्ष्मण राम, काशी राम, दशरथ राम, मुन्ना राम, अर्जुन राम, अर्जुन भुइयां, सुरेंद्र राम, मोतीचंद राम, सुकन भुइयां, यदुनी भुइयां, रामकेवल भुइयां, फागु भुइयां, महेंद्र भुइयां, भागू भुइयां, परीखा भुइयां, अशोक भुईयां, लक्ष्मण चंद्रवंशी, ढेमनी देवी, जेमिनी देवी, केदली देवी, लखनी देवी, कालिया देवी, भुनेश्वरी देवी सहित काफी संख्या में भीमखाड़ के ग्रामीण उपस्थित थे.
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