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East Singhbhum News : सर! रबी की खेती के लिए नहर में पानी छोड़ें, वरना हम भूखे मर जायेंगे

Updated at : 08 Jan 2025 12:06 AM (IST)
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East Singhbhum News : सर! रबी की खेती के लिए नहर में पानी छोड़ें, वरना हम भूखे मर जायेंगे

सुवर्णरेखा परियोजना के मुख्य अभियंता से मिले हेंदलजुड़ी और बाघुड़िया पंचायत के किसान, मुख्य अभियंता ने किसानों को दिया भरोसा, जल्द करेंगे पहल, किसानों में जगी उम्मीद

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गालूडीह. घाटशिला प्रखंड की हेंदलजुड़ी व बाघुड़िया पंचायत के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल दुलाल चंद्र हांसदा के नेतृत्व में मंगलवार को आदित्यपुर जाकर सुवर्णरेखा परियोजना के मुख्य अभियंता राम निवास प्रसाद से मिला. उन्हें ज्ञापन सौंपकर रबी की खेती के लिए चांडिल डैम से बायीं नहर में पानी छोड़ने की मांग की. किसानों ने कहा कि सिंचाई की सुविधा नहीं होने से रबी की खेती नहीं कर पा रहे हैं.

किसानों ने कहा कि खरीफ में बायीं नहर में पानी छोड़ा जाता है, पर रबी के मौसम में पानी नहीं छोड़ा जाता है. मुख्य बायीं नहर से बाघुड़िया और हेंदलजुड़ी पंचायत के किसानों को पानी मिलता है. हमारी जीविका खेती से चलती है. पानी मिल जायेगा, तो बेहतर खेती होगी. किसानों को आर्थिक लाभ होगा. मुख्य अभियंता ने भरोसा दिया कि जल्द पहल करेंगे. उन्होंने कहा कि हम लोग प्रयास कर रहे हैं कि किसानों को साल भर पानी मिले.

किसानों के प्रतिनिधिमंडल में हेंदलजुड़ी, कालाझोर, राजाबासा, हलुदबनी, पीड्राबांद, गुड़ाझोर, नरसिंहपुर आदि गांव के किसान शामिल थे. मौके पर दुलाल चंद्र हांसदा, मिर्जा हांसदा, अशोक मुर्मू, लक्ष्मण मुर्मू, सिदो मुर्मू, मोटका मुर्मू, शांखी लाल मुर्मू, रमेश हांसदा, मनोज गोप, कुशल टुडू, लाल मार्डी, फकीर सबर, पवन हांसदा, सुशांत हांसदा, रामचंद्र सोरेन, ठाकुरदास सोरेन. विश्वनाथ सोरेन, जंगल सोरेन आदि किसान शामिल थे.

झारखंड बॉर्डर किसान मजदूर संघर्ष समिति ने की मांग

झारखंड बॉर्डर किसान मजदूर संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालमोहन बास्के, उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह, सचिव बंकिम सिंह, सह सचिव गंगा सोरेन, कोषाध्यक्ष राजेन महतो, सह कोषाध्यक्ष सालखु मार्डी आदि ने नहर में साल भर पानी छोड़ने की मांग की है. साल भर पानी मिलेगा, तो किसान बेहतर खेती कर पायेंगे. एक फसली पर निर्भर नहीं रहेंगे. साल में कम से कम दो बार खेती जरूर होगी. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी. खेती होने से क्षेत्र से मजदूरों का पलायन रुकेगा.

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