PHOTOS: जमशेदपुर की हवा दिल्ली से भी खराब! एक्यूआइ 817, प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और टाटा स्टील ने उठाये सवाल

प्रदूषण से बचने के लिए चेहरा ढककर चलने को मजबूर लोग. फोटो : प्रभात खबर
Jamshedpur Weather AQI: 4 दिसंबर की शाम 5 बजे से लेकर रात 9 बजे तक हवा की गुणवत्ता खराब थी. शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक एक्यूआइ क्रमशः 277, 295, 330, 322 और 263 दर्ज किया गया. हालांकि दिन भर यह स्तर सामान्य से मध्यम स्थिति में बना रहा.
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Jamshedpur Weather AQI: क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म एक्यूआइ डॉट इन के अनुसार, बुधवार सुबह 9 बजकर 5 मिनट पर शहर का एक्यूआइ लेवल 817 दर्ज किया गया. यह स्तर सामान्य मानकों से कहीं ऊपर और बेहद खतरनाक माना जाता है. दिलचस्प यह है कि जिस समय दिल्ली की खराब हवा को लेकर देशभर में चिंता जतायी जा रही है, उसी दौरान जमशेदपुर की एयर क्वालिटी उससे भी खराब दर्ज हुई.
जेएसपीसीसीबी और टाटा स्टील ने आंकड़ों पर उठाये सवाल
एक्यूआइ डॉट इन के इस आंकड़े पर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (जेएसपीसीसीबी) और टाटा स्टील दोनों ने सवाल उठाये हैं. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि शहर में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की लाइव मॉनिटरिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है, ऐसे में इस डेटा का आधार स्पष्ट नहीं है. टाटा स्टील ने भी कहा है कि कंपनी द्वारा की जाने वाली नियमित जांच में हवा की गुणवत्ता सामान्य मानकों के भीतर पायी गयी है.

Jharkhand Weather AQI: एक दिन में हवा की गुणवत्ता में बड़ी उथल-पुथल
एक्यूआइ डॉट इन के लाइव डेटा के अनुसार, 5 दिसंबर को सुबह 6.04 बजे तक जमशेदपुर का एक्यूआइ स्तर 96 था, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है. इसके बाद स्तर तेजी से बढ़ा.
| समय | एक्यूआइ लेवल |
|---|---|
| सुबह 7 बजे | 222 |
| सुबह 8 बजे | 324 |
| सुबह 9.05 बजे | 817 (सबसे अधिक) |
| सुबह 10 बजे | 585 |
| सुबह 11 बजे | 284 |
रात 9 बजे तक खराब थी हवा की गुणवत्ता
इसके पहले 4 दिसंबर की शाम 5 बजे से लेकर रात 9 बजे तक हवा की गुणवत्ता खराब थी. शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक एक्यूआइ क्रमशः 277, 295, 330, 322 और 263 दर्ज किया गया. हालांकि दिन भर यह स्तर सामान्य से मध्यम स्थिति में बना रहा.
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एक्यूआइ लेवल बहुत अधिक दिखाया जा रहा है, पर इसका वास्तविक आधार क्या है, समझ से परे है. सीपीसीबी की लाइव कलेक्शन व्यवस्था जमशेदपुर में उपलब्ध नहीं है. हमारा क्षेत्रीय कार्यालय गोलमुरी, बिष्टुपुर और आदित्यपुर में मासिक जांच करता है, रोजाना डेटा उपलब्ध नहीं होता. इसलिए एक्यूआइ डॉट इन (aqi.in) का यह आंकड़ा संदिग्ध है.
जीतेंद्र सिंह, क्षेत्रीय पदाधिकारी, जेएसपीसीसीबी
सीपीसीबी गाइडलाइन के अनुसार एक्यूआइ के मायने
| एक्यूआइ का स्तर | एक्यूआइ के मायने |
|---|---|
| 0-50 | अच्छा |
| 51-100 | संतोषजनक |
| 101-200 | मध्यम |
| 201-300 | खराब |
| 301-400 | बहुत खराब |
| 401-500 | गंभीर |

नगर निकायों की प्रदूषण मॉनिटरिंग मशीनें बेकार
शहर की हवा पर निगरानी के लिए मानगो नगर निगम, जुगसलाई नगर परिषद और अन्य निकायों ने 3 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग मशीनें लगायीं थीं. मानगो चौक पर लगी मशीन फ्लाईओवर निर्माण के कारण हटा दी गयी. डिमना चौक पर लगी मशीन महीनों से खराब है. जुगसलाई के टाटा पिगमेंट गेट के पास लगी मशीन भी लंबे समय से बेकार पड़ी है. स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मशीनें लगायी जरूर गयीं, लेकिन इनके रख-रखाव और संचालन की तरफ किसी का ध्यान नहीं है. परिणामस्वरूप शहर में वास्तविक समय के प्रदूषण का कोई विश्वसनीय सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.
ये आंकड़े किस तरह तैयार किये गये हैं, इसकी जानकारी नहीं है. कंपनी मानक प्रक्रिया के तहत प्रदूषण स्तर की जांच करती है और इसके अनुसार हवा की गुणवत्ता सुरक्षित सीमा में है. एक्यूआइ डॉट इन के डेटा का कोई ठोस आधार नहीं दिखता.
राजेश राजन, प्रवक्ता, टाटा स्टील
प्रदूषण बोर्ड ने जारी किया कड़ा पत्र
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने शहर के निकायों को चेतावनी भरा पत्र भेजा है. इसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि सभी मॉनिटरिंग मशीनों को तुरंत चालू किया जाये. खराब मशीनों की मरम्मत करायी जाये या नयी मशीन लगायी जायें. एक्यूआइ डेटा में गफलत की स्थिति नहीं रहनी चाहिए. क्षेत्रीय पदाधिकारी जीतेंद्र सिंह ने सभी निकायों को बताया है कि हवा की गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी जनता तक सटीक और नियमित रूप से पहुंचना जरूरी है.

असल प्रदूषण स्तर पर असमंजस, सिस्टम पर सवाल
जमशेदपुर में प्रदूषण का स्तर कितना है, इस पर फिलहाल स्पष्टता नहीं है. एक ओर . एक्यूआइ डॉट इन के आंकड़े खतरनाक स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं सरकारी एजेंसियां और टाटा स्टील इस डेटा पर सवाल उठा रहे हैं. जो भी हो, नगर निकायों की प्रदूषण जांच मशीनें बंद पड़ी हैं. यह बड़ा सवाल है. जब तक शहर में सरकारी स्तर पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग बहाल नहीं होती, तब तक हवा की गुणवत्ता से जुड़ी हर रिपोर्ट संदेह के घेरे में रहेगी.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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