Dumka Campus News एसीपी-एमएसीपी में कटौती करने वाले एसकेएमयू ने नहीं दी हमें 30 वर्षों से प्रोन्नति

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 28 Nov 2024 11:08 PM

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बढ़ता ही जा रहा आंदोलनरत शिक्षकेतर कर्मचारियों का आक्रोश, कहा

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दुमका. सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय व अंगीभूत महाविद्यालयों में आंदोलन शिक्षकेतर कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है. ये शिक्षकेतर कर्मचारी एसीपी-एमएसीपी में कटौती व सप्तम वेतनमान में वेतन भुगतान की मांग करते-करते अब विश्वविद्यालय के साथ-साथ उच्च शिक्षा निदेशालय के उदासीन रवैये पर उग्र होते दिख रहे हैं. गुरुवार को शिक्षकेतर कर्मचारियों ने कहा कि सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की स्थापना भागलपुर विश्वविद्यालय से अलग होकर वर्ष 1992 में हुई थी. स्थापना के लगभग 33 वर्षों के बाद भी इस विश्वविद्यालय के सृजित पदों के विरुद्ध एक भी शिक्षकेतर कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की गयी. विश्वविद्यालय अंतर्गत विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों के कर्मचारियों को पदस्थापित कर सभी कार्यों का निष्पादन किया जा रहा है. विवि-कालेजों में अध्यापन के कार्य के अतिरिक्त ऐसा कोई कार्य नहीं है. इसमें इन शिक्षकेतर कर्मचारियों की भूमिका नहीं है, पर इनका आरोप है कि इनके योगदान को इसलिए नजरअंदाज कर दिया जाता है. क्योंकि हम कर्मचारी मंच पर नहीं आते. सच्चाई तो यही है कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के सृजित पदों के विरुद्ध मात्र 20 प्रतिशत कर्मचारी 100 प्रतिशत कार्यों का निष्पादन करते हैं. अर्थात हर कर्मचारी 5 गुणा अधिक कार्य समय पर करते हैं. कर्मियों ने कहा : जब तक एसीपी-एमएसीपी के लाभ सहित सातवें वेतन का भुगतान संबंधित अधिसूचना जारी नहीं हो जाती, हमारा आंदोलन जारी रहेगा.

हमारी स्थिति अब करो या मरो वाली :प्रक्षेत्रीय अध्यक्ष

प्रक्षेत्रीय अध्यक्ष परिमल कुंदन ने कहा कि हमें पांच गुणा कार्य बोझ देनेवाले इस विश्वविद्यालय ने पिछले 30 वर्षों से कोई प्रोन्नति नहीं दी. वर्ष 1996 से प्रभावी वेतन 2010 में प्रारंभ किया, तो वर्ष 2006 से प्रभावी वेतन 2015 में चालू किया, जबकि आठ साल पहले यानी वर्ष 2016 से प्रभावी वेतन अबतक नहीं दिया जा रहा. उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा 150 से ज्यादा कर्मियों का अब तक न तो पंचम और न ही छठे वेतनमान में वेतन निर्धारण को अनुमोदित नहीं किया गया है. दुखद तो यह भी कि पैतृक महाविद्यालयों से कर्मियों का पदस्थापन विश्वविद्यालय मुख्यालय कर दिया गया, जहां पिछले 33 वर्षों से वे किराये मकान में रहकर प्रतिदिन 20 किलोमीटर की दूरी तय कर कार्य कर रहे हैं, जिसके बदले प्रतिनियुक्ति भत्ता भी नहीं दिया जाता. श्री कुंदन ने कहा कि शिक्षकेतर कर्मचारियों के प्रति सरकार का रवैया सौतेला है. श्री कुंदन ने कहा कि हमें वित्त समिति और अभिषद के निर्णय के उपरांत एसपीपी-एमएसीपी का यह लाभ दिया जा रहा था. ऐसे में विवि को यदि कटौती करनी ही थी तो वित्त समिति और अभिषद की बैठक आहूत कर निर्णय लेने के उपरांत ऐसा किया जा सकता था. कहा कि पांचवें, छठे एवं सातवें वेतनमान में वेतन निर्धारण नहीं होने के कारण प्रत्येक कर्मचारी का 10 लाख रुपये से ज्यादा बकाया है. अगर विवि हम कर्मचारियों के कल्याण की जरा भी भावना यदि विवि प्रशासन को होती तो इन बकाये से भविष्य में सामंजन भी किया जा सकता था. विवि प्रशासन को हमारे देय लाभ के भुगतान के प्रति सक्रिय होना चाहिए था, न कि कटौती के प्रति. श्री कुंदन ने कहा किकर्मचारियों के प्रति विवि शासन के इस असंवेदनशील भावना से हम काफी आहत हैं और अब हमारी स्थिति करो या मरो की है.

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