संताल समाज की पहचान उसकी भाषा व संस्कृति से, नहीं भूलें युवा

Published by : RAKESH KUMAR Updated At : 11 Apr 2025 11:51 PM

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एसपी कॉलेज प्रांगण में धूमधाम से मना संताली साहित्य दिवस, बोले सांसद नलिन सोरेन

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दुमका नगर. संताली भाषा साहित्य व आदिवासी सांस्कृतिक परिषद की ओर से 47वां संताली साहित्य दिवस एसपी कॉलेज प्रांगण में धूमधाम से मनाया गया. मुख्य अतिथि सांसद नलिन सोरेन, विशिष्ट अतिथि आजसू व जेपीपी के संस्थापक व पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा, प्राचार्य डॉ खिरोधर प्रसाद यादव, साहित्यकार चुंडा सोरेन सिपाही मौजूद थे. शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू मुर्मू, फूलो झानो व एसपी कॉलेज के संस्थापक स्व लाल बाबा हेंब्रम की प्रतिमा पर माल्यार्पण व श्रद्धापुष्प अर्पित कर किया. मौके पर परिषद के द्वारा प्रकाशित स्मारिका दिनिसा साकाम का विमोचन किया गया. सांसद नलिन सोरेन ने अपनी भाषा और साहित्य को संजो कर रखने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अपनी भाषा-साहित्य एवं संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए. संताल समाज की पहचान व उसकी सांस्कृतिक विरासत है. आठवीं अनुसूची में शामिल संताली भाषा को अब करेंसी में भी मुद्रित होना है. साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के बावजूद भाषा नीति लागू नहीं हुई है. राज्य में साहित्य अकादमी का गठन नहीं हुआ है, जबकि बंगाल सहित विभिन्न राज्यों में साहित्य अकादमी का गठन हुआ है. उन्होंने इसे दुखद बताया. स्वागत भाषण देते हुए एसपी कॉलेज के प्राचार्य डॉ केपी यादव ने कहा साहित्य और संस्कृति हमारे समाज के दर्पण होते हैं. हमें सही रास्ते पर ले जाने में मदद करते हैं. साहित्य हमारे समाज की बौद्धिक संपदा है. सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुजीत कुमार सोरेन ने कहा कि अपनी भाषा, लिपि और धर्म हमारी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. अगर हम अपनी भाषा, लिपि और धर्म को भूल जाते हैं, तो हम अपनी पहचान खो देते हैं और समाज में हमारी भूमिका कम हो जाती है. मौके पर श्याम देव हेंब्रम, राजीव बास्की, राजेंद्र मुर्मू, ठाकुर हांसदा, जोसेफ बास्की, उपेंद्र मरांडी, भीमसेन सोरेन, सनातन मरांडी, उषा मरांडी, किरण मरांडी, राजेश मुर्मू, मनोज टुडू आदि मौजूद थे. क्विज के विजेताओं को किया पुरस्कृत संताल लाहान्ती बाइसी के द्वारा पूर्व में करायी गयी क्विज के विजेताओं को समारोह के मंच से पुरस्कृत किया गया. क्विज प्रतियोगिता के आयोजन का उद्देश्य यहां के गरीब आदिवासी छात्र-छात्राओं को प्रतियोगिता के लिए प्रेरित करना ही है. प्रतियोगिता में कुल 145 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया था. समारोह में जो प्रतिभागी पुरस्कार के भागीदार बनें, उनमें नुनूधन टुडू, सनातन मरांडी, ऊषा मरांडी, जितेंद्र मुर्मू, किरण मरांडी, सुभाषिनी मरांडी शामिल रहे. क्विज सफल बनाने के लिए संताल लाहान्ती बा़ईसी के संयोजक जोसेफ बास्की, सुलिश सोरेन, बिमल कुमार टुडू, ठाकुर हांसदा, एमानवेल हेंब्रम, राम सोरेन, श्यामदेव हेंब्रम, राजीव बास्की, राजेंद्र मुर्मू, भीमसेन सोरेन, उपेंद्र मरांडी, विल्सन हेंब्रम की भूमिका अहम रही.

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