37 दिनों तक तड़पा और फिर हारा जिंदगी की जंग, गुमला में आग से जले बुजुर्ग की मौत, बहन का बड़ा आरोप

Updated at : 16 Mar 2026 9:21 PM (IST)
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Gumla Murder Mystery

नानू मिंज की फाइल फोटो

Gumla Murder Mystery: गुमला के बसिया में 37 दिन पहले पुआल में जलने वाले नानू मिंज की इलाज के दौरान मौत हो गयी. बहन ने लिव-इन पार्टनर पर आग लगाकर दरवाजा बाहर से बंद करने का आरोप लगाया है.

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Gumla Murder Mystery, गुमला, (दुर्जय पासवान): गुमला स्थित बसिया थाना क्षेत्र के लोंगा गांव में हुई एक दर्दनाक और रहस्यमय घटना ने आखिरकार मौत का रूप ले लिया. 51 वर्षीय नानू मिंज की सोमवार सुबह करीब 10 बजे सदर अस्पताल गुमला में इलाज के दौरान मौत हो गयी. वह पिछले 37 दिनों से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था. उसकी मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव में घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी हैं.

पुआल के ढेर में लग गयी थी आग

जानकारी के अनुसार सात फरवरी की शाम नानू मिंज अपने घर में रखे पुआल के ढेर पर सोया हुआ था. इसी दौरान अचानक पुआल में आग लग गयी और यह पल भर में ही विकराल रूप धारण कर लिया. उस समय वह घर के अंदर फंसा हुआ था और दरवाजा बाहर से बंद होने के कारण नहीं निकल सका. घर से धुआं उठता देख ग्रामीण मौके पर पहुंचे और दरवाजा खोलकर उसे बाहर निकाला. तब तक वह बुरी तरह झुलस चुका था.

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37 दिनों से चल रहा था अस्पताल में इलाज

ग्रामीणों की मदद से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसिया ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत देखते हुए उसे सदर अस्पताल गुमला रेफर कर दिया गया. करीब 37 दिनों तक अस्पताल में उसका इलाज चला. डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उसे रांची स्थित रिम्स ले जाने की सलाह दी थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिजन उसे वहां नहीं ले जा सके.

बहन ने लगाया चौंकाना वाला आरोप

नानू की मौत के बाद उसकी बहन फगनी उरांव ने चौंकाने वाला आरोप लगाया है. उसने पुलिस को दिये बयान में कहा कि उसके भाई के साथ लिव-इन में रह रही मूक-बधिर महिला अरुणा तिर्की ने ही पुआल में आग लगाकर बाहर से दरवाजा बंद कर दिया था. घटना के बाद वह फरार हो गयी. बताया जाता है कि नानू पिछले एक साल से गांव में उसी महिला के साथ रह रहा था.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठने लगे सवाल

इधर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण वे नानू को रिम्स नहीं ले जा सके और अस्पताल की ओर से भी कोई विशेष मदद नहीं मिली. इस घटना के बाद एक ओर जहां हत्या की आशंका जताई जा रही है, वहीं स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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