बांग्ला 29 चैत 12 अप्रैल से शुरू होगा रानीश्वरनाथ शिव मंदिर में तेलपुड़ा मेला

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 09 Apr 2024 11:32 PM

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रानीश्वरनाथ शिव मंदिर का इतिहास 450 साल से भी अधिक पुराना

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रानीश्वर.बांग्ला पंचांग के 29 चैत 12 अप्रैल शुक्रवार से रानीश्वर के ऐतिहासिक तेलपुड़ा मेला शुरू होगा. मेले की तैयारी जोर शोर से चल रही है. प्रतिवर्ष यहां 29 चैत से ही दस दिवसीय मेला लगता है. यहां के शिव मंदिर का इतिहास 450 साल से भी अधिक पुराना है. 1564 में मुगल सम्राट अकबर के एक अधिकारी आसफ खां द्वारा गांडेयान के राजा गिरिनारायण पर हमले की योजना बनायी गयी थी, जिसके चलते राजमाता इस क्षेत्र में आयी थी. यहां दूसरे दिन उन्होंने मयूराक्षी नदी के तट पर अपना डेरा डाला था. बाद में अनुचरों एवं परिचायिकाओं को उन्होंने जंगल साफ कर घर बनाने का निर्देश दिया था. उस समय यह इलाका घने जंगल से घिरा था. घर बनने के बाद रानी ने अनुचरों का विवाह परिचायिकाओं के साथ करा दिया था. बाद में आबादी बढ़ने से यह गांव में तब्दील हो गया. गांडेयान की राजमाता के नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम रानीग्राम व उनके द्वारा स्थापित कराये गये मंदिर का नाम रानीश्वरनाथ शिव मंदिर पड़ा. इसी मंदिर प्रांगण में हर साल बंगला पंचांग के 29 चैत को तेलपुड़ा मेला लगता है. 29 चैत 12 अप्रैल शुक्रवार की सुबह मंदिर प्रांगण में विशेष पूजा अर्चना जलार्पण तथा यज्ञ का आयोजन किया जाएगा. शाम में मंदिर में दीये जलाने के बाद यहां मन्नत रखने वाले श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर के चारों ओर सरसों तेल के दीये जलाये जाते हैं. रात भर श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में दीये जलाते हैं. मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में पहुंच कर दीये जलाते हैं. इसके एक दिन पहले अर्थात 28 चैत 11 अप्रैल को यहां भक्त उपवास रहकर पूजा अर्चना करते हैं तथा मंदिर प्रांगण में आग व कांटे पर खेलते हैं. यह परंपरा भी वर्षों पुरानी है. तेलपुड़ा मेला के पहले शिव मंदिर की रंगाई पुताई तथा साफ-सफाई की गयी है. तेलपुड़ा मेला के उपलक्ष्य में लगने वाले मेला शांति पूर्ण रूप से संपन्न कराने को लेकर एक बीस सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. जिसमें तापस पांडा को अध्यक्ष, बामदेव पांडा को सचिव तथा राजेश राय को कोषाध्यक्ष बनाया गया है. मेला कमेटी के अध्यक्ष तापस पांडा ने बताया कि इस बार आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू रहने के कारण बहुत सा आईटम मेला में नहीं रहेगा. हालांकि मेला शांति पूर्ण रूप से संपन्न कराने को लेकर मेला कमेटी की ओर से स्वयंसेवकों की टीम गठित की गयी है. वहीं प्रशासन की ओर से मेडिकल कैंप तथा अग्निशमन गाड़ी की व्यवस्था रहेगी. पुलिस की ओर से भी निगरानी की व्यवस्था रहेगी. बांग्ला पंचांग के 29 चैत 12 अप्रैल शुक्रवार से रानीश्वर के ऐतिहासिक तेलपुड़ा मेला शुरू होगा. मेले की तैयारी जोर शोर से चल रही है. प्रतिवर्ष यहां 29 चैत से ही दस दिवसीय मेला लगता है. यहां के शिव मंदिर का इतिहास 450 साल से भी अधिक पुराना है. 1564 में मुगल सम्राट अकबर के एक अधिकारी आसफ खां द्वारा गांडेयान के राजा गिरिनारायण पर हमले की योजना बनायी गयी थी, जिसके चलते राजमाता इस क्षेत्र में आयी थी. यहां दूसरे दिन उन्होंने मयूराक्षी नदी के तट पर अपना डेरा डाला था. बाद में अनुचरों एवं परिचायिकाओं को उन्होंने जंगल साफ कर घर बनाने का निर्देश दिया था. उस समय यह इलाका घने जंगल से घिरा था. घर बनने के बाद रानी ने अनुचरों का विवाह परिचायिकाओं के साथ करा दिया था. बाद में आबादी बढ़ने से यह गांव में तब्दील हो गया. गांडेयान की राजमाता के नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम रानीग्राम व उनके द्वारा स्थापित कराये गये मंदिर का नाम रानीश्वरनाथ शिव मंदिर पड़ा. इसी मंदिर प्रांगण में हर साल बंगला पंचांग के 29 चैत को तेलपुड़ा मेला लगता है. 29 चैत 12 अप्रैल शुक्रवार की सुबह मंदिर प्रांगण में विशेष पूजा अर्चना जलार्पण तथा यज्ञ का आयोजन किया जाएगा. शाम में मंदिर में दीये जलाने के बाद यहां मन्नत रखने वाले श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर के चारों ओर सरसों तेल के दीये जलाये जाते हैं. रात भर श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में दीये जलाते हैं. मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में पहुंच कर दीये जलाते हैं. इसके एक दिन पहले अर्थात 28 चैत 11 अप्रैल को यहां भक्त उपवास रहकर पूजा अर्चना करते हैं तथा मंदिर प्रांगण में आग व कांटे पर खेलते हैं. यह परंपरा भी वर्षों पुरानी है. तेलपुड़ा मेला के पहले शिव मंदिर की रंगाई पुताई तथा साफ-सफाई की गयी है. तेलपुड़ा मेला के उपलक्ष्य में लगने वाले मेला शांति पूर्ण रूप से संपन्न कराने को लेकर एक बीस सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. जिसमें तापस पांडा को अध्यक्ष, बामदेव पांडा को सचिव तथा राजेश राय को कोषाध्यक्ष बनाया गया है. मेला कमेटी के अध्यक्ष तापस पांडा ने बताया कि इस बार आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू रहने के कारण बहुत सा आईटम मेला में नहीं रहेगा. हालांकि मेला शांति पूर्ण रूप से संपन्न कराने को लेकर मेला कमेटी की ओर से स्वयंसेवकों की टीम गठित की गयी है. वहीं प्रशासन की ओर से मेडिकल कैंप तथा अग्निशमन गाड़ी की व्यवस्था रहेगी. पुलिस की ओर से भी निगरानी की व्यवस्था रहेगी.

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