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दुमका में आज़ और कल दोनाें दिन मनेगी मकर संक्रांति

Updated at : 13 Jan 2026 10:52 PM (IST)
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दुमका में आज़ और कल दोनाें दिन मनेगी मकर संक्रांति

तिलकुट की सोंधी खुशबू से गमक रहा बाजार, तिलकुट-गजक के अलावा चूड़ा-गुड़ की जमकर खरीदारी हुई. बाजार में लोगों की भीड़ लगी रही.

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दुमका नगर. मकर संक्रांति को लेकर दुमका में उत्साह का माहौल है, बाजारों में लोगों की चहल-पहल देखने को मिल रही है. इस बार जिले में मकर संक्रांति दो दिन मनायी जा रही है. मकर संक्रांति का त्योहार 14 व 15 को मनाया जा रहा है. पर्व को लेकर मंगलवार को खरीदारी के लिए बाजार में लोगों की भीड़ लगी रही. देर शाम तक लोग तिलकुट, चूड़ा, दही के अलावा तिल के लड्डू के साथ-साथ चूड़ा और मुढ़ी के बने लड्डू की बिक्री हुई. ऐसी मान्यता है कि इस दिन तिल का सेवन करना काफी शुभ माना जाता है. यह पर्व सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक माना जाता है. त्योहार को लेकर बाजार में काफी समय से तिलकुट की बिक्री हो रही थी. चौक-चौराहों पर अस्थायी दुकानें लगाकर दुकानदार सामानों की बिक्री कर रहे है. बाजार में कतरनी चूड़ा की मांग सबसे ज्यादा है. लोग इसकी खरीदारी भी कर रहे है. दुकानदार ने बताया कि चूड़ा की कई किस्में बाजार में है लेकिन सबसे ज्यादा मांग कतरनी चूड़े की है. सामान्य चूड़ा 36 रुपए किलो बिक रहे हैं. वहीं अच्छी क्वालिटी का चूड़ा 40 रुपए प्रति किलो बिक रहा है. साथ ही कतरनी चूड़ा 100 से 120 रुपए प्रति किलो बिक रहे हैं. इसके अलावा लोग अपने घरों में भी तिल-गुड़ के लड्डू और पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं. इस पर्व में सबसे ज्यादा मांग दही की रहती है. लोग समय से पहले ही दही की एडवांस बुकिंग भी कर लेते हैं, ताकि समय पर उन्हें दही उपलब्ध हो सके. पर्व के अवसर पर नदी, तालाबों में श्रद्धालू स्नान कर दान भी करते हैं, इस पर्व में दान का विशेष महत्व होता है.

भगवान सूर्य के उत्तरायण में पहुंचते ही शुरु हो जाते हैं मांगलिक कार्य :

मकर संक्रांति से ही सृष्टि में महत्वपूर्ण परिवर्तन हाेना प्रारंभ हो जाता है. इस दिन से ही भगवान सूर्य के उत्तरायण होते हैं और इसी के साथ देवताओं के दिन भी शुरू हो जाते हैं. इस दिन से ही खरमास समाप्त हो जाता है और शादी-विवाह जैसे कई मांगलिक कार्य की शुरुआत हो जाती है. भगवान सूर्य के उत्तरायण होने पर ठंड से परेशान संसार के जीव-जंतु को राहत मिलने लगती है.

कार्टून कैरेक्टर वाले पतंग की डिमांड :

मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा हमेशा से रही है. इस दिन लोग पतंग उड़ाना शुभ मानते हैं. बच्चे भी काफी उत्साह के साथ पतंग उड़ाते हैं और एक-दूसरे की पतंग को बड़े उत्साह के साथ काटते भी हैं. आसमान में इस दिन सिर्फ रंग-बिरंगे पतंग ही देखने को मिलते हैं. बाजार में भी रंग-बिरंगे पतंग की बिक्री भी हुई. पतंग के विक्रेता श्रवण स्टोर के मालिक श्रवण सर्राफ ने बताया कि बच्चों को कार्टून कैरेक्टर के बने डिजाइन के पतंग खूब पसंद आ रहे हैं और वो इनकी खरीदारी भी कर रहे हैं. इसमें मिकी माउस, मोटू-पतलू, बेन टेन और 2026 लिखा हुआ पतंग की सबसे ज्यादा हो रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BINAY KUMAR

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BINAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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