झारखंड में वेतन संकट: चुनाव ड्यूटी पर गए सचिव, 12 विभागों के कर्मियों की अटकी सैलरी

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Jharkhand Salary Crisis

झारखंड में 12 विभागों के कर्मियों की अटकी सैलरी

Jharkhand Salary Crisis: झारखंड में हजारों सरकारी कर्मचारियों की जेब खाली है! चुनाव ड्यूटी में सचिवों की व्यस्तता और कुबेर पोर्टल की तकनीकी खराबी के कारण 12 प्रमुख विभागों में अब तक वेतन का भुगतान नहीं हो सका है. हालांकि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन अन्य विभागों के कर्मियों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. जानिए आखिर कहाँ फंसा है पेंच और कब तक आएगी सैलरी. पढ़ें, विशेष रिपोर्ट

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Jharkhand Salary Crisis, रांची (विवेक चंद्रा की रिपोर्ट): झारखंड में आईएएस अधिकारियों की चुनाव ड्यूटी के कारण कई विभागों के कर्मचारियों का वेतन भुगतान बुरी तरह प्रभावित हो गया है. दरअसल उत्पाद, वन, कृषि, खाद्य आपूर्ति, कल्याण, ऊर्जा और ग्रामीण विकास समेत करीब 12 विभागों के सचिव मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत से ही चुनावी कार्यों में व्यस्त हैं. नियमों के अनुसार, सचिवों की अनुपस्थिति में वेतन मद में राशि का आवंटन समय पर जारी नहीं हो सका, जिससे कर्मचारियों की सैलरी लंबित हो गई है.

कुबेर पोर्टल की तकनीकी खराबी ने बढ़ाई मुश्किल

वेतन भुगतान में देरी की एक बड़ी वजह राज्य सरकार का ‘कुबेर पोर्टल’ भी है. वित्तीय वर्ष की समाप्ति (Year Ending) और नए वर्ष की शुरुआत के दौरान पोर्टल पर लोड बढ़ने के कारण तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो गईं. पोर्टल सुचारु रूप से काम नहीं करने की वजह से विभाग समय पर फंड का आवंटन नहीं कर पाए, जिसका सीधा असर निचले स्तर के कर्मियों के भुगतान पर पड़ा है.

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शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के लिए राहत

इधर कुछ विभागों से अच्छी खबर भी सामने आई है. वित्त विभाग के निर्देशानुसार शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने वेतन मद में आवंटन जारी कर दिया है. ट्रेजरी ने आवश्यक जांच के बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी है और गुरुवार से इन विभागों के कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन की राशि पहुंचने लगी है.

बाकी विभागों को करना होगा लंबा इंतजार

जिन विभागों के सचिव फिलहाल चुनाव ड्यूटी पर हैं और जहां से अब तक आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है, वहां के कर्मचारियों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं. विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन कर्मियों को वेतन के लिए संबंधित सचिवों के ड्यूटी से वापस लौटने तक का इंतजार करना पड़ सकता है. वर्तमान परिस्थितियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आर्थिक तंगी का सामना करने को मजबूर हैं.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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