संकट में रांची का HEC: वेतन बकाया और नए वर्क ऑर्डर न मिलने से बिगड़े हालात, बड़े अधिकारियों ने भी छोड़ा साथ

Published by :Sameer Oraon
Published at :19 Apr 2026 6:48 AM (IST)
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HEC Ranchi Crisis

रांची का एचईसी

HEC Ranchi Crisis: रांची का गौरव एचईसी अब अपने सबसे बुरे दौर में है. दो साल से वेतन बकाया, नए वर्क ऑर्डर का अभाव और अब बड़े अधिकारियों के इस्तीफे ने संस्थान के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. हटिया कामगार यूनियन ने केंद्र सरकार पर एचईसी को जानबूझकर बंदी की ओर धकेलने का आरोप लगाया है.

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रांची, (राजेश झा की रिपोर्ट): रांची स्थित हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) इन दिनों अपने अस्तित्व के सबसे गंभीर आर्थिक संकट और अनिश्चित भविष्य से जूझ रहा है. हटिया कामगार यूनियन (एटक) के उपाध्यक्ष लालदेव सिंह ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि पिछले दो वर्षों से संस्थान को सोची-समझी रणनीति के तहत बंदी की ओर धकेला जा रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्र किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता देने से लगातार पीछे हट रहा है, जिससे संस्थान की स्थिति दयनीय हो गई है.

वेतन संकट और अधिकारियों का पलायन

एचईसी में कर्मचारियों के बकाया वेतन का मुद्दा अब विस्फोटक रूप ले चुका है. न केवल वर्तमान कर्मियों का वेतन लंबित है, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया का भी निपटारा नहीं हो रहा है. भविष्य को अंधकारमय देखते हुए अब अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों ने संस्थान का साथ छोड़ना शुरू कर दिया है. हाल ही में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी लोरेंस भेंगरा और एक मैनेजर ने इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले वेलनेस सेंटर की मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी भी पद छोड़ चुकी हैं.

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कार्यादेश का अभाव: ठप हो सकता है उत्पादन

संस्थान के पास वर्तमान में जो कार्यादेश (Work Orders) हैं, वे इसी माह समाप्त होने वाले हैं. नए कार्यादेश नहीं मिलने के कारण उत्पादन पूरी तरह ठप होने का खतरा मंडरा रहा है. लालदेव सिंह ने बताया कि नियमानुसार इस्तीफे के 48 घंटे के भीतर बकाया भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन एचईसी में पिछले आठ वर्षों से इस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

भविष्य को लेकर गहराता असंतोष

यूनियन का कहना है कि एचईसी को बचाने के लिए अब सरकार के स्तर पर ठोस और तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है. यदि जल्द ही नए कार्यादेश और आर्थिक पैकेज की व्यवस्था नहीं की गई, तो हजारों परिवारों की रोजी-रोटी छीन जाएगी. एचईसी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए न केवल कर्मचारी, बल्कि पूरा रांची शहर चिंतित है, क्योंकि इस संस्थान का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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