रिम्स जमीन फर्जीवाड़ा: दो आरोपियों की जमानत पर सुनवाई पूरी, फैसला 6 जून को

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 03 Jun 2026 2:39 PM

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रिम्स जमीन फर्जीवाड़ा में सुनवाई पूरी. प्रतीकात्मक फोटो.

Ranchi News: रांची के चर्चित रिम्स जमीन फर्जीवाड़ा मामले में दो आरोपियों राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है. एसीबी विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 6 जून को आदेश सुनाने की तिथि तय की है. मामला 9.65 एकड़ अधिग्रहित जमीन से जुड़ा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से प्रवीण कुमार मुंडा की रिपोर्ट

Ranchi News: रांची में चर्चित रिम्स जमीन फर्जीवाड़ा मामले में ट्रायल फेस कर रहे दो आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है. एसीबी के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अदालत इस मामले में 6 जून को अपना आदेश सुनाएगी.

दो आरोपियों की जमानत याचिका पर हुई सुनवाई

जिन आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, उनमें राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक शामिल हैं. दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और उनके खिलाफ रिम्स की अधिग्रहित जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में जांच चल रही है. अदालत में बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे, जिसके बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया.

हाई कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी

यह मामला तब चर्चा में आया जब झारखंड हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया. हाई कोर्ट के निर्देश के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 5 जनवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज की थी. जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आने के बाद एसीबी ने कार्रवाई तेज कर दी.

चार आरोपियों को किया गया था गिरफ्तार

एसीबी ने 7 अप्रैल 2026 को इस मामले में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इनमें राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक, राजेश झा और चेतन कुमार शामिल हैं. जांच एजेंसी का आरोप है कि सभी ने आपसी मिलीभगत से सरकारी जमीन को निजी संपत्ति के रूप में दर्शाने की साजिश रची थी.

फर्जी वंशावली बनाकर जमीन पर किया गया दावा

जांच के अनुसार आरोपियों ने रिम्स की अधिग्रहित जमीन को निजी भूमि साबित करने के लिए फर्जी वंशावली और दस्तावेज तैयार किए थे. इन दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर मालिकाना हक जताने की कोशिश की गई. एसीबी का मानना है कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र था, जिसके जरिए सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा किया गया.

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9.65 एकड़ जमीन से जुड़ा है पूरा मामला

पूरा मामला वर्ष 1964-65 में रिम्स के लिए अधिग्रहित लगभग 9.65 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि इस जमीन पर अवैध कब्जा कर अपार्टमेंट, दुकानें और मकान तक बना लिए गए. मामले की जांच जारी है और अदालत के आगामी फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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