मनमर्जी बयानबाजी पर झारखंड कांग्रेस सख्त, प्रभारी के. राजू ने दी मंत्रियों को सख्त हिदायत, बनायी गाइडलाइन

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कांग्रेस का चिन्ह और प्रभारी के. राजू

कांग्रेस का चिन्ह और प्रभारी के. राजू

झारखंड कांग्रेस में गुटबाजी और मनमर्जी बयानबाजी पर लगाम कसने के लिए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने सख्त रुख अपनाया है. मंत्रियों को अब पार्टी की तयशुदा लाइन पर ही बात रखनी होगी. आगामी 6 महीनों तक प्रमंडलवार कैंपेन चलाया जाएगा.

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रांची से सतीश सिंह की रिपोर्ट

रांची : झारखंड कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और अलग-अलग बयानबाजी पर लगाम कसने के लिए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने सख्त रुख अपनाया है. कांग्रेस कोटा के मंत्रियों और पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक बदलाव रातों-रात संभव नहीं है. पार्टी अब पूर्ण अनुशासन, एकजुटता और जन-सरोकार के मुद्दों के साथ जनता के बीच उतरेगी.

अलग-अलग बयानों पर लगी रोक

अक्सर देखा जाता है कि एक ही जनहित या राजनीतिक मुद्दे पर पार्टी के मंत्रियों के बयान अलग-अलग आते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है. प्रभारी के. राजू ने इसी विषय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सख्त निर्देश जारी किया है. उन्होंने कहा है कि कोई भी मंत्री अब बिना पार्टी के आंतरिक प्लेटफॉर्म पर चर्चा किए सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करेगा. साथ ही सभी मंत्रियों को केवल तयशुदा 'पार्टी लाइन' पर ही अपनी बात रखनी होगी. इसके लिए एक विशेष 'फोरम' का गठन किया जाएगा. हर 15 दिनों में सभी मंत्री इस फोरम में एक साथ बैठेंगे और जनमुद्दों पर सर्वसम्मति से एक राय बनाएंगे.

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6 महीने तक चलेगा प्रमंडलवार कैंपेन

कैंपेन कमेटी की बैठक में आगामी रणनीति तय करते हुए वरीय नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले 6 महीनों तक हर प्रमंडल में दो-दो कमेटियां लगातार कैंपेन चलाएंगी. इस अभियान के तहत प्रमंडल स्तर पर सेमिनार, वर्कशॉप और पब्लिक मीटिंग (जनसभाओं) का आयोजन किया जाएगा, ताकि सीधे जनता से जुड़कर उनके जमीनी मुद्दों को समझा जा सके.

2 महीने में जिलों का दौरा अनिवार्य

बैठक में यह बात भी सामने आई कि मंत्रियों का जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं और जनता से सीधे संवाद करने का कार्यक्रम धरातल पर सही से नहीं उतर पा रहा है. इस पर चिंता जताते हुए प्रभारी ने कड़ा निर्देश दिया कि अगले 2 महीनों के भीतर सभी मंत्री अनिवार्य रूप से जिलों का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे. इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि दलितों के मानवीय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए झारखंड में 'अनुसूचित जाति आयोग' (SC Commission) का गठन बेहद जरूरी है. इसके लिए मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है और आयोग के गठन तक पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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