झारखंड हाईकोर्ट की चेतावनी: सेवानिवृत्त कर्मियों को पेंशन न मिली तो रूकेगा नगर विकास सचिव का वेतन

Published by : Sameer Oraon Updated At : 18 Apr 2026 9:19 PM

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झारखंड हाईकोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड में पेंशनभोगियों के हक पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. सेवानिवृत्त कर्मियों को बकाया भुगतान न करने पर झारखंड हाईकोर्ट ने नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार का वेतन रोकने की चेतावनी दी है. यही नहीं, हजारीबाग और रामगढ़ के उपायुक्तों समेत चार अधिकारियों के वेतन पर लगी रोक भी बरकरार रखी गई है.

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Jharkhand High Court, रांची (राणा प्रताप की रिपोर्ट): झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन और बकाया भुगतान से जुड़े अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने एकल पीठ द्वारा दो वर्ष पूर्व दिए गए आदेश का अनुपालन सुनिश्चित न होने पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि अगले छह सप्ताह के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार का वेतन स्वतः ही रुक जाएगा.

चार अधिकारियों का वेतन पहले से ही है बंद

सुनवाई के दौरान नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव समेत अन्य अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए. अदालत ने पाया कि पिछली सुनवाई के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. इसी आधार पर कोर्ट ने चार अधिकारियों- हजारीबाग उपायुक्त नैंसी सहाय, रामगढ़ उपायुक्त चंदन कुमार, हजारीबाग नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी जोगेंद्र प्रसाद और रामगढ़ नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार के वेतन पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया. इन अधिकारियों का वेतन भुगतान अगले आदेश तक बंद रहेगा.

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दो साल से लंबित है पेंशन का हक

यह पूरा मामला माइंस बोर्ड के सेवानिवृत्त कर्मचारी रवींद्र नाथ एवं अन्य द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है. करीब दो वर्ष पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सरकार को निर्देश दिया था कि सभी प्रार्थियों को छठे और सातवें वेतन आयोग के अनुरूप संशोधित पेंशन और बकाया राशि का भुगतान 12 सप्ताह के भीतर किया जाए. हालांकि, सरकार ने इस आदेश के खिलाफ अपील याचिका दायर कर रखी है, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक आदेश का क्रियान्वयन नहीं होता, तब तक अवमानना की कार्रवाई जारी रहेगी.

प्रशासनिक जवाबदेही पर सख्त संदेश

हाईकोर्ट ने अपने 20 मार्च 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अधिकारियों को पर्याप्त समय दिया जा चुका है. अब और ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा है. सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पक्ष में आई इस सख्त टिप्पणी ने हजारों बुजुर्ग कर्मियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगा दी है.

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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