रूस की क्रीमिया फेडरल यूनिवर्सिटी से डॉ. अनन्य नमन केशरी बने एमबीबीएस, पिठोरिया में खुशी का माहौल

रूस से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने वाले डॉ अनन्य नमन केशरी.
पिठोरिया के युवा डॉ. अनन्य नमन केशरी ने रूस की प्रतिष्ठित क्रीमिया फेडरल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि ने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।
पिठोरिया से सुजीत कुमार केशरी की रिपोर्ट
Ranchi News: मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर पिठोरिया के युवा डॉ अनन्य नमन केशरी ने रूस की प्रतिष्ठित क्रीमिया फेडरल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त कर अपने परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है. उनकी इस उपलब्धि से पिठोरिया सहित आसपास के इलाकों में खुशी का माहौल है. जैसे ही उनके एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने की सूचना लोगों तक पहुंची, परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देना शुरू कर दिया.
कठिन मेहनत और लगन से हासिल की सफलता
डॉ. अनन्य नमन केशरी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे पाने के लिए निरंतर मेहनत की जाए, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है. विदेश में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करना आसान नहीं होता. इसके लिए कठिन अध्ययन, अनुशासित जीवनशैली और लगातार प्रयास की आवश्यकता होती है. डॉ अनन्य ने इन सभी चुनौतियों का सामना करते हुए रूस की प्रतिष्ठित क्रीमिया फेडरल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की. उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके माता-पिता का सपना पूरा किया, बल्कि पिठोरिया के युवाओं के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता हासिल की जा सकती है.
परिवार की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया
डॉ अनन्य नमन केशरी की उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उस परिवार की गौरवशाली परंपरा का भी विस्तार है, जिसने शिक्षा, सेवा और सामाजिक मूल्यों को हमेशा प्राथमिकता दी है. इसी परिवार की नई पीढ़ी के डॉ स्वस्ति केशरी और डॉ. शाश्वत केशरी पहले से ही चिकित्सा क्षेत्र में अपनी सेवाओं और प्रतिभा के लिए पहचान बना चुके हैं. अब डॉ अनन्य नमन केशरी ने भी एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त कर इस गौरवशाली परंपरा में एक और उपलब्धि जोड़ दी है. परिवार के लोगों का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह सफलता प्रेरणा का स्रोत बनेगी.
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
परिजनों के अनुसार डॉ अनन्य ने कठिन परिश्रम, समय का सदुपयोग और अटूट आत्मविश्वास के बल पर यह मुकाम हासिल किया है. उन्होंने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो दुनिया के किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान में सफलता प्राप्त की जा सकती है. उनकी उपलब्धि पिठोरिया और झारखंड के उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो चिकित्सा और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखते हैं. यह सफलता यह संदेश देती है कि लगातार प्रयास और सकारात्मक सोच से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
परिवार और क्षेत्रवासियों ने दी शुभकामनाएं
डॉ. अनन्य नमन केशरी की इस उपलब्धि पर उनकी दादी चंद्रावती देवी, पिता सतीश कुमार केशरी, चाचा सुधीर कुमार केशरी एवं सुजीत कुमार केशरी, बड़े पापा डॉ. संजय कुमार केशरी, बड़ी मम्मी डॉ. सुनीता केशरी, दादा डॉ. अशोक कुमार केशरी, फुआ रेणु केशरी, प्रोफेसर डॉ. सविता केशरी, डॉ. सीमा केशरी, शेखर कुमार, दीपक चौरसिया, अनिल केशरी, स्वामी देवेंद्र प्रकाश, डॉ. अमरेंद्र कुमार तथा पंचायत समिति सदस्य श्रवण गोप सहित परिवार के सभी सदस्यों, शुभचिंतकों और ग्रामवासियों ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं.
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सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य, सफल चिकित्सकीय जीवन और जनसेवा के प्रति समर्पित कार्यों की कामना करते हुए विश्वास जताया कि डॉ अनन्य नमन केशरी भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देकर समाज और देश का नाम रोशन करेंगे. उनकी सफलता ने पिठोरिया के युवाओं में नया उत्साह भर दिया है और यह साबित किया है कि प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प के सामने भौगोलिक सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं.
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By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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