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पेयजल के लिए जूझना पड़ रहा इन दिनों ग्रामीणों को

Updated at : 13 Jan 2026 10:55 PM (IST)
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पेयजल के लिए जूझना पड़ रहा इन दिनों ग्रामीणों को

कई गांवों में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा लगाए गए जलमीनार ग्रामीणों को पानी देने की बजाय शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं.

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रानीश्वर. प्रखंड के रांगालिया पंचायत सहित बिलकांदी, गोबिंदपुर, दक्षिणजोल आदि पंचायतों के कई गांवों में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा लगाए गए जलमीनार ग्रामीणों को पानी देने की बजाय शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं. सोलर संचालित 5000 लीटर क्षमता वाली इन जलमीनारों पर सरकार ने लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन तकनीकी खराबी और घटिया सामग्री के कारण ग्रामीणों को आज भी चापानल का सहारा लेना पड़ रहा है. रांगालिया पंचायत के कुकड़ीभाषा गांव में ही चार जलमीनार पूरी तरह बेकार पड़े हैं. कहीं मोटर खराब है तो कहीं पानी टंकी लीक हो रही है, जबकि कुछ स्थानों पर बोरिंग असफल होने से टंकी में पानी चढ़ ही नहीं पा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि जलमीनार निर्माण में संवेदकों द्वारा घटिया किस्म की प्लास्टिक टंकी और अन्य सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे कुछ ही समय में टंकी फट गयी या लीक करने लगी.

प्रशासन को दी गयी सूचना, कार्रवाई का इंतजार :

रांगालिया पंचायत के मुखिया जीशु वास्की ने बताया कि पंचायत में बैठक कर खराब जलमीनारों की मरम्मत कराकर चालू कराने का प्रस्ताव पारित किया गया है. बीडीओ के माध्यम से संबंधित विभाग को पत्र भी भेजा गया, लेकिन अब तक कोई जवाब या अनुमति नहीं मिली है. ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी खराब जलमीनारों की जल्द मरम्मत कराकर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी योजना का वास्तविक लाभ उनलोगों तक पहुंच सके.

केस स्टडी–1 : मोटर ले गए, छह माह से नहीं लौटी

कुकड़ीभाषा आंगनबाड़ी केंद्र के समीप लगाये गये जलमीनार से कुछ दिनों तक जलापूर्ति हुई थी, जिससे आसपास के ग्रामीणों को जलापूर्ति का लाभ मिला था. उसके बाद जलमीनार का मोटर खराब हो जाने के बाद से जलापूर्ति बंद हो गया है. ग्रामीण कुतुबुद्दीन अंसारी, इरशाद मियां ने बताया कि इसकी शिकायत विभाग से किये जाने के बाद संवेदक के आदमी मोटर मरम्मत कराने के लिए खोल कर ले गया है. छह महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक वापस नहीं लाया गया है. नतीजा जलमीनार शोभा की वस्तु बनी हुई है. यहां जलमीनार चालू कराये जाने से आसपास के लोगों को पेयजल सुविधा उपलब्ध हो सकती है.

केस स्टडी–2 : लीक टंकी से दिनभर बहता रहता है पानी :

कुकड़ीभाषा गांव के ही साद्दाम अंसारी के घर के समीप पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से लगाये गये जलमीनार का पानी टंकी लीकेज हो जाने से उससे दिनभर पानी टंकी से गिरते रहता है. सूरज की रोशनी जब तक रहती है, तब तक टंकी में पानी उठता है. शाम ढलते ही टंकी में पानी खत्म हो जाता है. रात के समय पानी की जरूरत मिलने पर टंकी से पानी नहीं मिल पाता है. ग्रामीण सद्दाम अंसारी, अफजल अंसारी, मतुजुद्दीन अंसारी ने बताया कि विभाग को संज्ञान लेते हुए लीकेज पानी टंकी की मरम्मत कराये जाने या टंकी बदलने के लिए पहल करनी चाहिए ताकि ग्रामीणों को जरूरत के अनुसार रात को भी पानी उपलब्ध हो सके.

केस स्टडी–3 : बोरिंग फेल, शुरू से बंद जलमीनार :

कुकड़ीभाषा गांव के ही खेल मैदान के समीप लगाये गये जलमीनार भी शुरू से ही शोभा की वस्तु बनी हुई है. ग्रामीणों ने बताया कि यहां जलमीनार लगाने के लिए बोरिंग किया गया था, पर बोरिंग सफल नहीं होने से जलमीनार की पानी टंकी पर पानी चढ़ाने की व्यवस्था नहीं हो सकी है. यहां जलमीनार लगाने के लिए लोहे का स्ट्रक्चर लगातार प्लास्टिक का पानी टंकी व सोलर प्लेट लगाया गया है, जो बेकार पड़ा हुआ है. गांव के एक ओर जलमीनार भी खराब होकर बंद पड़ा है. खेल मैदान के समीप जलमीनार चालू रहने से खिलाड़ियों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी इसका लाभ मिल पाता.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BINAY KUMAR

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