झारखंड निकाय चुनाव: दुमका का मिठाई वाला बना अध्यक्ष, यह अनोखा चुनावी मंत्र बना गेम चेंजर

दुमका नगर परिषद के अध्यक्ष बने अभिषेक चौरसिया, Symbolic Pic Image Credit- Chatgpt AI
Jharkhand Municipal Election Result 2026: दुमका नगर परिषद चुनाव 2026 में भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाकर पहली बार अभिषेक चौरसिया अध्यक्ष बने. जानिए कैसे 15 साल बनाम 1 साल की रणनीति और जनता से सीधा जुड़ाव ने उन्हें एक बड़ी जीत दिलाई. पूरी कहानी और जश्न की झलक यहां देखें.
Jharkhand Municipal Election Result 2026, दुमका : दुमका नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनाव लड़ कर अध्यक्ष पद पर पहली बार निर्वाचित हुए अभिषेक चौरसिया को लगभग सभी वार्ड में व्यापक जनसमर्थन मिला है. जमीनी स्तर पर पकड़ रखने वाले अभिषेक व्यवसायी हैं, उनकी मिठाई की दुकान है. दो बार पार्षद रह चुके अभिषेक चौरसिया यूं तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता रहे हैं. 2018 में उन्होंने पिछला निकाय चुनाव उपाध्यक्ष के पद के लिए पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लड़ा था. भले तब वे जीत नहीं पाये थे, पर मजबूत उम्मीदवार साबित जरूर हुए थे.
झामुमो ने दुमका से किसी उम्मीदवार को नहीं दिया समर्थन
इस बार झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दुमका में किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया था. यही वजह रही कि उन्हें आमजनों ने वोट तो दिया ही, पार्टी के कैडर भी उनके साथ प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से दिखे. अभिषेक चौरसिया ने इस बार के चुनाव में पूरी जान लगा दी थी. वोट नहीं वे मदद मांगते थे. भ्रष्टाचार पर खूब आवाज उठायी थी और दोनों पूर्व अध्यक्षों के कार्यकाल को लेकर सवाल खड़े किये थे. 15 साल बनाम एक साल का मुद्दा बनाया था और एक साल में ही दुमका को बदलने की बात कही थी. महिलाओं ने भी उनके लिए खूब जनसंपर्क किया था. रसिकपुर में नाली-पानी के अभाव को भी उन्होंने बड़ा मुद्दा बनाया था.
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जीत के बाद जगह-जगह जश्न का माहौल
दुमका नगर परिषद के अध्यक्ष पद पर अभिषेक चौरसिया के जीत के बाद समर्थकों द्वारा शहर में जगह-जगह जश्न मनाया जा रहा था. मतगणना केंद्र दुमका इंजीनियरिंग कालेज के गेट के बाहर समर्थक टार्च की माला लिए उनके स्वागत-अभिनंदन को आतुर दिखे, तो शिवपहाड़ समेत दूसरे मुहल्ले और चुनाव कार्यालय से बड़ी तादाद में समर्थक झूमते-नाचते अबीर-गुलाल उड़ाते इंजीनियरिंग काॅलेज की ओर जमा हो रहे थे. देर शाम तक जश्न में पूरा इलाका डूबा हुआ था.
जीत की पांच वजह
- उपाध्यक्ष का चुनाव हारने के बाद आठ साल मैदान में डटे रहे.
- हमेशा पैर छूकर आशीर्वाद व वोट की बजाय मदद मांगते दिखे.
- 10 साल पार्षद का अनुभव भी काम आया. वहां के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया.
- महिलाओं का साथ मिला, जनसंपर्क की टीम में महिलाएं शामिल रहीं.
- क्षेत्रवार नागरिक सुविधाओं में कमी को दूर करने का भरोसा दिलाया.
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लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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