घटिया ईंटों का हो रहा कूप निर्माण में प्रयोग
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 18 Jun 2024 11:47 PM
रामगढ़ प्रखंड की सिलठा बी पंचायत का हाल, मनरेगा सिंचाई कूप निर्माण में बिचौलिये हावी
रामगढ़. सिलठा बी पंचायत में मनरेगा के तहत निर्माणाधीन बिरसा कृषि सिंचाई कूप संवर्धन योजना में बिचौलिये पूरी तरह से हावी हैं. सिलठा बी पंचायत में मनरेगा के तहत 92 सिंचाई कूपों का निर्माण विभिन्न गांवों में कराया जा रहा है. मनरेगा योजनाओं में निर्माण स्थल पर सूचना पट्ट लगाये जाने का प्रावधान है. लेकिन ज्यादातर स्थानों पर सूचना पट्ट भी नहीं लगाये गये हैं. प्रत्येक सिंचाई कूप की लागत लगभग चार लाख रुपये है. विभाग द्वारा बनाए गए मॉडल एस्टीमेट के अनुसार इन सिंचाई कूपों का व्यास 12 फीट तथा गहराई 35 फीट रखी जानी चाहिए. सिंचाई कूपों के निर्माण में 75 बी चिमनी ईंटों का प्रयोग होना चाहिए. लेकिन सिलठा बी पंचायत में सारे नियमों को ताक पर रखकर सिंचाई कूप का निर्माण कराया जा रहा है. चिमनी ईंट की बजाय घटिया क्वालिटी के स्थानीय बांग्ला भट्ठा वाले ईंट लगाए जा रहे हैं. साथ ही प्राक्कलन के अनुरूप 35 फीट की गहराई तक की खुदाई भी नहीं की जा रही है. विभागीय कर्मियों एवं अधिकारियों द्वारा बिरसा सिंचाई कूपों के निर्माण का अनुश्रवण नियमानुसार नहीं किया जा रहा है. जिसके कारण बिचौलियों के हौसले बुलंद हैं और वे प्राक्कलन की बजाय अपनी मनमर्जी से कूपों का निर्माण कर रहे हैं. सिलठा बी पंचायत के छोटा सिमल पहाड़ी,कुंडा, पोडैपानी, ऊपर ग्रहण, हेठ ग्रहण, कुलापाथर, सिलठा बी जैसे लगभग सभी गांवों में कूप निर्माण में ऐसी ही अनियमितता बरती जा रही है. जिससे बिचौलिए मालामाल हो रहे हैं. वहीं प्राक्कलन के अनुरूप काम नहीं होने तथा घटिया क्वालिटी के ईटों का प्रयोग होने के कारण कूपों के धंसने का खतरा उत्पन्न हो गया है. बिचौलियों की मनमानी तथा अधिकारियों की लापरवाही के कारण कृषि कार्यों में सिंचाई की सुविधा बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही बिरसा सिंचाई कूप संवर्धन योजना की सफलता पर सिलठा बी पंचायत में संदेह उत्पन्न हो गया है. मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में विभागीय कर्मियों के साथ-साथ पंचायती राज के जन प्रतिनिधियों विशेष तौर पर मुखिया की भूमिका महत्वपूर्ण है.लेकिन सिलठा बी पंचायत में मनरेगा योजनाओं में व्याप्त गड़बड़ी के प्रति मुखिया एवं वार्ड सदस्यों सहित पंचायती राज के जन प्रतिनिधियों का रवैया उदासीन है.
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