भागवत कथा में परीक्षित जन्म प्रसंग सुन श्रद्धालु हुए भावविभोर

Published by : ANAND JASWAL Updated At : 18 May 2026 6:46 PM

विज्ञापन

वृंदावन के कथा वाचक धर्नुधराचार्य जी महाराज ने पांडव प्रसंग, परीक्षित जन्म कथा, महाभारत एवं श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया.

विज्ञापन

प्रतिनिधि, नोनीहाट जरमुंडी प्रखंड की पेटसार पंचायत अंतर्गत कोरडीहा में आयोजित भागवत सप्ताह भक्ति ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धा व भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला. वृंदावन के कथा वाचक धर्नुधराचार्य जी महाराज ने पांडव प्रसंग, परीक्षित जन्म कथा, महाभारत एवं श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया. उन्होंने बताया कि महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद पांडव वंश में केवल अभिमन्यु का पुत्र ही शेष बचा था. अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा गर्भवती थीं. उसी समय द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोध में आकर ब्रह्मास्त्र चला दिया, ताकि पांडव वंश समाप्त हो जाये. भयभीत उत्तरा ने भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की. तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को समाप्त कर बालक की रक्षा की. बाद में जन्मे उस बालक का नाम परीक्षित रखा गया. कथा वाचक ने सुखदेव जी के अवतार एवं जन्म प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया. उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने वेद-पुराणों की रचना की, लेकिन उन्हें आत्मिक शांति नहीं मिली. तब नारद मुनि ने उन्हें भगवान की भक्ति एवं लीला का वर्णन करने की प्रेरणा दी, जिसके बाद श्रीमद् भागवत महापुराण की रचना हुई. महाराज जी ने कहा कि भगवान की कथा सुनने मात्र से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है. कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर झूम उठे. कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ थी.

विज्ञापन
ANAND JASWAL

लेखक के बारे में

By ANAND JASWAL

ANAND JASWAL is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola