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Mahashivratri 2023: दुमका के इस शिव मंदिर की क्या है खासियत, दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु

Updated at : 17 Feb 2023 2:24 PM (IST)
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Mahashivratri 2023: दुमका के इस शिव मंदिर की क्या है खासियत, दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु

महेशपुर प्रखंड मुख्यालय में बांसलोई नदी किनारे अवस्थित बूढ़ा बाबा महेश्वरनाथ शिव मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र है. दरअसल, इस मंदिर की एक अलग खासियत है. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां भगवान भोलेनाथ का दर्शन करने आते हैं.

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Mahashivratri 2023: झारखंड राज्य की उपराजधानी दुमका से 72 किलोमीटर उत्तर पश्चिम तथा जिला मुख्यालय पाकुड़ से 28 किलोमीटर दक्षिण पूर्व स्थित महेशपुर प्रखंड मुख्यालय में बांसलोई नदी किनारे अवस्थित श्री श्री 1008 बूढ़ा बाबा महेश्वरनाथ शिव मंदिर आदिवासी और गैर आदिवासियों के बीच आस्था व श्रद्धा का केंद्र है. इस शिव मंदिर के प्रति दूरदराज के लोगों की आस्था का मूल कारण आपरूपी प्रकट स्वयं कामना शिवलिंग है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गयी कामना अवश्य पूरी होती है.

जनश्रुति के मुताबिक महेश्वर नामक साधारण चरवाहे द्वारा मवेशियों को चराते वक्त पहली बार इस शिवलिंग को देखा गया था. लगभग दो फीट ऊंचाई तथा करीब डेढ़ फीट गोलाकार के इस शिवलिंग पर महाशिवरात्रि के दिन एवं पवित्र श्रावण महीने के अवसर पर शिवभक्त पश्चिम बंगाल के जंगीपुर से गंगाजल लाकर भोले बाबा का जलाभिषेक करते हैं. यहां आसपास के जिलों से शिवभक्त महाशिवरात्रि व श्रावण मास के समय प्रत्येक वर्ष काफी संख्या में जलाभिषेक के लिए आते हैं. महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवभक्तों की उमड़ी भीड़ के बीच बाबा महेश्वरनाथ की छवि अति निराली देखी जाती है. इनकी अद्भुत महिमा को लेकर दर्जनों कहानियां प्रचलित हैं, जो इनके भक्तों की श्रद्धा को अटूट बनाए हुए हैं.

अतिवृद्ध लोगों का कहना है कि बहुत समय पहले एक बार महेशपुर में भीषण सुखाड़ पड़ा था. सब ओर से निराश लोगों ने सूखे से निजात पाने के लिए शिवलिंग को चारों ओर से घेर कर जल में डुबोने का प्रयास किया था. काफी प्रयास के बाद भी शिवलिंग नहीं डूबा मगर दूसरे ही दिन काफी बारिश हुई. जनश्रुति यह भी है कि पहली बार शिवलिंग के देखे जाने की खबर पाकर तत्कालीन समय के सुल्तानाबाद के नाम से जाना जाने वाला आज का महेशपुर के तत्कालीन राजाओं ने शिवलिंग को महल परिसर में स्थापित करने के उद्देश्य से लोहे की जंजीरों से बांधकर हाथियों द्वारा जमीन से निकालने का प्रयास किया था, जो असफल रहा था. पर शायद इसी वजह से शिवलिंग एक ओर थोड़ा-सा झुका हुआ है.

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