उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ आस्था के महापर्व छठ संपन्न

Updated at : 08 Nov 2024 11:23 PM (IST)
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उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ आस्था के महापर्व छठ संपन्न

सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ. इस पावन अवसर पर छठ घाटों पर श्रद्धा, भक्ति और विश्वास का अद्भुत नजारा देखने को मिला.

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दुमका. उपराजधानी दुमका और इसके आस-पास के क्षेत्रों में सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ. इस पावन अवसर पर छठ घाटों पर श्रद्धा, भक्ति और विश्वास का अद्भुत नजारा देखने को मिला. घाटों की सजावट और व्रतियों के लिए की गई व्यवस्थाओं के कारण सभी घाट बेहद भव्य दिखाई दे रहे थे. छठ पर्व के दौरान दुमका के सभी प्रमुख घाटों पर न सिर्फ अर्घ्य के समय बल्कि देर रात तक बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे. रात में खुबबांध और बड़ाबांध में जागरण और भव्य आतिशबाजी का आयोजन हुआ, जिससे माहौल और भी जीवंत हो उठा. खुटाबांध में देर रात तक चले जागरण कार्यक्रम में इंदु शर्मा, मानसी तिवारी, किशन, मीनू जैसे कलाकारों ने भक्ति गीतों की प्रस्तुतियों से समां बांधा. सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर व्रती महिलाएं सूर्योदय का इंतजार करती रहीं. जैसे ही सूर्य देव के दर्शन हुए, व्रतियों ने जल में खड़े होकर उन्हें अर्घ्य अर्पित किया और विधिवत पूजा-अर्चना की. उत्साहित भक्तों ने जयकारों के साथ श्रद्धा प्रकट की. छठ मैया का डाला लेकर भक्तजन मधुर भक्ति गीतों के बीच गाजे-बाजे के साथ छठ घाट पहुंचे. दुमका के बड़ाबांध, खुटाबांध, रसिकपुर बड़ाबांध, लखीकुंडी, बंदरजोरी, पुसारो, दुधानी और हरणाकुंडी सहित विभिन्न तालाबों में व्रतियों ने सूर्य को अर्घ्य दिया. बासुकिनाथ के शिवगंगा, जरमुंडी के गरडी बांध और रावत बांध में भी हजारों श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ व्रतियों ने अपने 36 घंटे के निर्जला उपवास का पारण किया. रामगढ़ क्षेत्र में व्रतियों ने गंगाजल और दूध के साथ “ओम सूर्य सहस्रांशो तेजो राशि जगत्पते, अनुकंपय मा मत्वा गृहाणार्ध्यम् दिवाकर ” मंत्र से भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित कर सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और कल्याण का आशीर्वाद मांगा. छठ पर्व के दौरान व्रतियों के घरों के अलावा गांवों, टोलों और छठ घाटों में भी भक्ति गीत गूंजते रहे. शिकारीपाड़ा प्रखंड के कजलादहा, सरसडंगाल, बेनागड़िया, मोहुलपहाड़ी, बरमसिया, कुशपहाड़ी, राजबांध, पर्वतपुर और अन्य स्थानों पर श्रद्धा के साथ छठ पर्व मनाया गया. अन्य इलाकों जैसे हाड़ोरायडीह, तिलाबाद, नागड़ापाथर, दलाही, मसालिया, कैरबनी, बास्कीडीह, गुमरो, बाराटांड़, अस्ताजोरा, गोलबंधा और जामा थाना क्षेत्र के आसनजोर, बारापलासी, लक्ष्मीपुर, लकड़ापहाड़ी, सिरसानाथ, भीखमपुर, बीचकोड़ा जैसे गाँवों में भी पूरे नेम-निष्ठा के साथ छठ मैया की पूजा सम्पन्न हुई. गोपीकांदर प्रखंड के गोपीकांदर, खरौनी बाजार और कुश्चिरा में भी श्रद्धा और उल्लास के साथ छठ महापर्व का आयोजन किया गया.

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