1978 में बुद्धिजीवियों ने देखा था विवि का सपना

दुमका : शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए संताल परगना में अलग विश्वविद्यालय स्थापित कराने की मांग को लेकर पहली बैठक 1978 में दुमका के बाल भारती स्कूल के प्रांगण में हुई थी, जिसमें इस क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों एवं गणमान्य लोगों के साथ-साथ बिहार के तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री महादेव मरांडी एवं […]
दुमका : शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए संताल परगना में अलग विश्वविद्यालय स्थापित कराने की मांग को लेकर पहली बैठक 1978 में दुमका के बाल भारती स्कूल के प्रांगण में हुई थी, जिसमें इस क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों एवं गणमान्य लोगों के साथ-साथ बिहार के तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री महादेव मरांडी एवं सांसद बटेश्वर हेंब्रम भी मौजूद थे. यह बैठक अधिवक्ता हिमांशु शेखर सिन्हा की अध्यक्षता में हुई थी.
कमलेश्वरी प्रसाद सिंह, अभयकांत प्रसाद, गोकुल हेंब्रम, गणेश साह अधीर, श्रीराम केशरी जैसे लोगों ने संताल परगना के आदिवासी, पहाड़िया सहित क्षेत्र में बसे युवाओं को बेहतर उच्च शिक्षा दिलाने के लिए संताल हूल के अमर नायक सिदो व कान्हू के नाम पर विवि स्थापित कराये जाने की मांग का प्रस्ताव तैयार किया था और तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री महादेव मरांडी के जरिये इसे सरकार तक पहुंचाया था. जिसके बाद यह मांग जोर पकड़ने लगी और इस विश्वविद्यालय का गठन हो पाया.
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