राष्ट्र की प्रगति में शिक्षा की भूमिका अहम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Aug 2015 6:50 AM (IST)
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दुमका पहुंचीं राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, आज फहरायेंगी तिरंगा, कार्यक्रम में बोलीं दुमका : कल्याण विभाग द्वारा उपराजधानी दुमका में विश्व आदिवासी दिवस सप्ताह पर एक समारोह आयोजित किया गया. मुख्य अतिथि के तौर पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आदिवासियों के गौरव और उनकी सांस्कृतिक परंपरा समृद्ध रही है, जिसे विकास के साथ आगे […]
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दुमका पहुंचीं राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, आज फहरायेंगी तिरंगा, कार्यक्रम में बोलीं
दुमका : कल्याण विभाग द्वारा उपराजधानी दुमका में विश्व आदिवासी दिवस सप्ताह पर एक समारोह आयोजित किया गया. मुख्य अतिथि के तौर पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आदिवासियों के गौरव और उनकी सांस्कृतिक परंपरा समृद्ध रही है, जिसे विकास के साथ आगे बढ़ाने व आदिवासी समुदाय को संविधान प्रदत्त अधिकार सुनिश्चित कर विकास योजनाओं का लाभ उन्हें उपलब्ध कराने की जरूरत है. सबका साथ सबका विकास की इस भावना से विकास के प्रयास में आदिवासियों का विकास सन्नहित है.
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति में शिक्षा की अहम भूमिका होती है. अधिक-से-अधिक लोग उच्च शिक्षा हासिल करें, हमारी यही कोशिश होनी चाहिये.
तकनीकी शिक्षा के आयामों को भी अपनायें. आज का दौर तकनीक का है. कौशल विकास से आदिवासियों को जोड़े जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों की स्वास्थ्य चुनौतियों के प्रति भी कारगर प्रयास किया जाना चाहिए. उन्होंने जनजातीय समाज से अपील की कि वे पूर्णरूपेण जागरूक होकर विकास व कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े. नशा से मुक्त रहे. शिक्षा को अपनायें ताकि गरीबी, अशिक्षा, पलायन, अंधविश्वास व सामाजिक कुरीतियों आदि से हम मुक्त हो सके एवं विकसित राज्य और राष्ट्र के निर्माण की दिशा में अपना सहयोग दे सके.
राज्यपाल ने कहा कि यह राज्य वीरों की भूमि है. इस राज्य में धरती आबा बिरसा मुंडा, बीर बुधु भगत, सिदो, कान्हू, चांद, भैरव समेत अनेक सपूत हुए हैं. जिन्होंने देश एवं समाज के लिए अपनी जान तक की परवाह नहीं की. गौरव की बात है कि इन वीरों का जन्म जनजातीय कुल में ही हुआ था.
राज्यपाल ने यह भी कहा कि अति प्राचीन काल से ही आदिवासी समुदाय भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के अभिन्न अंग रहे हैं. इस समुदाय का इतिहास काफी समृद्ध रहा है. विश्वस्तर पर इसकी अमिट पहचान रही है. भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के ये अभिन्न अंग रहे हैं. जनजातियों की कला, संस्कृति, लोक सहित्य, परंपरा एवं रीति-रिवाज समृद्ध रही है. जनजाति प्रकृति प्रेमी होते हैं, इसकी झलक पर्व-त्योहार में भी देख सकते हैं. जनजातियों के गायन और नृत्य उस समुदाय तक ही सीमित नहीं हैं, सभी के अंदर उस पर झूमने के लिए इच्छा जगा देती है.
अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सका है आदिवासी समुदाय का विकास : लोइस
विशिष्ट अतिथि समाज कल्याण महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री डॉ लोइस मरांडी ने कहा कि आदिवासी समुदाय का विकास हमारी अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सका है. सरकार का उद्देश्य उन छोटी-छोटी योजनाओं को जनता के बीच प्रचारित एवं प्रसारित करना है. जो उनके हितों के लिए बनाए गये हैं.
डॉ लोइस मरांडी ने आदिवासी समुदाय के युवाओं को अपने कौशल विकास पर ज्यादा ध्यान देने की बात कही. वहीं कार्यक्रम को नगर पर्षद अध्यक्ष अमिता रक्षित ने भी संबोधित किया. स्वागत संबोधन आयुक्त संताल परगना एल ख्यांग्ते ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डीसी राहुल कुमार सिन्हा ने की. मौके पर राज्यपाल के प्रधान सचिव मस्त राम मीणा, डीआइजी देव बिहारी शर्मा एवं जिप अध्यक्ष पुलिस नाथ मरांडी मौजूद थे.
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