प्रभात खबर का सावनोत्सव : हरे परिधान में सावन के गीतों पर के बीच महिलाओं ने उठाया उत्सव का आनंद

Updated at : 12 Aug 2024 1:20 AM (IST)
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प्रभात खबर का सावनोत्सव : हरे परिधान में सावन के गीतों पर के बीच महिलाओं ने उठाया उत्सव का आनंद

सावन के झूलों ने मुझको बुलाया, मैं परदेशी घर वापस आया...गीत पर झूमीं महिलाएं, सैलेट बनीं सावन क्वीन

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सावन के झूलों ने मुझको बुलाया, मैं परदेशी घर वापिस आया…गीत पर महिलाएं झूम रहीं थीं. हरे परिधानों में महिलाओं ने रैम्प वॉक भी किया. सैलेट को सावन क्वीन चुना गया. मौका था प्रभात खबर की आयोजित सावन महोत्सव का. कुसुम विहार स्थित डेस्टिनी द प्रामिस मेरिज हॉल में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने खूब मस्ती की. कई प्रकार खेल हुए, सवाल-जवाब का भी दौर चला. कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि धनबाद एसएसपी एचपी जनार्दनन की पत्नी नमिता जनार्दनन थीं. मुख्य अतिथि समेत अन्य अतिथियों ने कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की. इसके बाद गीत-संगीत का दौर चला. सबसे पहले सब्र बैंड के विनसेट व सचिन ने पुराने कर्णप्रिय गीत प्रस्तुत कर शमां बांधा. सचिन ने ये शाम मस्तानी…, पल पल दिल के पास…, देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए…,मिलों ना तुम, तो दिन घबराए… आदि गीत गाकर महिलाओं का मनोरंजन किया. इसके महिलाएं बदल बरसा बिजुली, सावन को पानी… गीत पर खूब झूमीं. मौके पर प्रायोजक सोनल ब्यूटी पार्लर की सोनल वर्मा, गोकुल स्वीट्स सरायढेला की जोशना केशरी व डेस्टनी द प्राॅमिस मैरिज हॉल के अरुण सिंह मौजूद थे.

दो ग्रुप में बंटकर महिलाओं ने दिखायी प्रतिभा :

सावनोत्सव में लगभग सौ महिलाएं आयीं थीं. सभी महिलाओं को 50-50 के दो ग्रुप में बांट दिया गया. इसके बाद दोंनों ग्रुप की महिलाओं ने अपनी प्रतिभा दिखायी. सबसे पहले रैंप वॉक हुआ. इस दौरान सभी महिलाओं ने रैंप वॉक कर अपना परिचय दिया. सावन क्वीन चुनने में नमिता जनार्दनन, जोशन केशरी व सोनल वर्मा ने निर्णायक की भूमिका निभायी. दूसरी ओर अंताक्षर हुआ. इसमें भी दोनों ग्रुप की महिलाओं ने भाग लिया. सबसे पहले ग्रुप-2 की महिलाओं ने म अक्षर से मैं निकल गड्डी ले के…. गाना गाया. उसके बाद ग्रुप-1 ने या हू चाहे कोई मुझे जंगली कहे… गीत गाये. राउंड दो में महिलाओं के लिए कटोरे में पर्ची लिखकर गाने के बोल डाले गये. महिलाओं द्वारा उस चिट को उठा कर उसमें लिखे हुए बोल से गाने गये गये. पर्ची में प्यार किया नहीं जाता हो जाता है…, मेहंदी लगा कर रखना डोली सजा कर रखना… आदि गीत लिखे हुए थे. इस राउंड को ग्रुप-2 ने जीत हासिल की. अगला खेल गाने के संगीत को पहचान कर उस पूरा करना था. इस खेल में गलत गाने गाने पर ग्रुप-1 का माइनस पांच अंक किये गये. वहीं सही गाने पर ग्रुप-2 का पांच अंक दिये गये. कार्यक्रम के दौरान डॉ हरिंदर कौर ने सावन पर एक कविता सुनायी. सभी खेलों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली आठ महिलाओं को सावन क्वीन के फाइनल के लिए चुना गया.

पूछे गये समाज और सुंदरता पर सवाल

सभी खेलों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को फाइनल राउंड के लिए चुना गया. इनमें शालिनी कुमारी, नीरू सिंह पोपट, सविता, साधन सूद, हरिंदर कौर, शालिनी थीं. सभी महिलाओं से जीवन, समाज, सुंदरता पर सवाल किये गये. जजों ने काफी विचार के बाद सैलेट को सावन क्वीन चुना. वहीं दूसरे स्थान पर नीरू सिंह पोपट और तीसरे स्थान पर साधन सूद रहीं. अंत में महिलाओं के लिए ओपन फ्लोर का आयोजन किया गया. इसमें सावन के झूलों…, हाय हाय रे मजबूरी…,सावन का महीना, आया सावन झूम के…,रिमझिम गिरे सावन…. गाने पर महिलाएं थिरकीं.

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