प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनी बंदियों की समस्या

Updated at : 26 May 2024 6:35 PM (IST)
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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनी बंदियों की समस्या

जेल प्रशासन को दिये कई आवश्यक निर्देश, शिविर में बंदियों को दी गयी कानून की जानकारी

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विधि प्रतिनिधि, धनबाद,

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार व झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर धनबाद के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के चेयरमैन राम शर्मा ने रविवार को जिला व सत्र न्यायाधीश सुजीत कुमार सिंह, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरती माला, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजीव त्रिपाठी, अवर न्यायाधीश राकेश रोशन के साथ धनबाद मंडल कारा का औचक निरीक्षण किया. जेल में कुल 636 दोष सिद्ध व विचाराधीन बंदी मिले. न्यायाधीश ने कारागार के प्रत्येक बैरक में पहुंचकर बंदियों से उनके स्वास्थ्य, इलाज, पेयजल, नास्ता, भोजन व मुकदमे में पैरवी के लिए अधिवक्ता होने अथवा न होने की जानकारी ली. स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हुए न्यायाधीश ने बंदियों के शौचालयों की साफ-सफाई का निर्देश दिया. कारागार अस्पताल में निरुद्ध बीमार बंदियों के बेहतर इलाज के लिए उन्हें उच्च स्वास्थ्य सेंटर भेजे जाने का निर्देश जेल डॉक्टर को दिया. वहीं शिक्षापरक व रोजगारपरक शिविरों का आयोजन कराकर उन्हें प्रशिक्षित करने का निर्देश जेलर को दिया. महिला बैरक में निरुद्ध कुल 26 महिला बंदियों से मुलाकात कर न्यायाधीश ने उनकी समस्याओं को सुना. न्यायाधीश ने चिकित्सा सुविधाओं, पुस्तकालय, रसोई घर, वहां तैयार हो रहे भोजन, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र और ध्यान-सह-योग केंद्र में सुविधाओं का जायजा लिया. उन्होंने बंदियों से भी बातचीत की और उनकी समस्याओं के बारे में पूछा. उन्होंने जेल प्रशासन को बंदियों को नियमानुसार सुविधाएं मुहैया कराने जेल अधिकारियों को उनके कर्तव्य का समुचित रूप से पालन करने का निर्देश दिया.

बंदियों को दी गयी कानून की जानकारी

इसके पूर्व मंडल कारा धनबाद में विधिक जागरूकता शिविर लगाया गया. इसमें जिला व सत्र न्यायाधीश सुजीत कुमार सिंह ने बंदियों के अधिकार, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरती माला ने प्ली बारगेनिंग अधिनियम, हाइकोर्ट द्वारा चलाये जा रहे यूटीआरसी स्कीम के बारे में जानकारी दी. अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजीव त्रिपाठी ने जमानत संबंधी प्रावधान के विषय में जानकारी दी. अवर न्यायाधीश राकेश रोशन ने कहा कि वैसे बंदी जो अपराध के मामलों में जेल में बंद हैं तथा अधिवक्ता रखने में सक्षम नहीं हैं, उनके मुकदमे की नि:शुल्क पैरवी जिला विधिक सेवा प्राधिकार में चीफ, डिप्टी चीफ व असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल की नियुक्ति की गयी है. उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि बंदियों की समस्याओं के समाधान के लिए लीगल एड डिफेंस काउंसिल से नि:शुल्क विधिक सहायता प्राप्त करें. इसके लिए बंदी आवेदन जिला विधिक सेवा प्राधिकार को भेजें. मौके पर डिप्टी जेलर दिनेश वर्मा, एलडीसीएस के चीफ कुमार विमलेंदु, डिप्टी चीफ अजय कुमार भट्ट, एलएडीसीएस के असिस्टेंट काउंसिल सुमन पाठक, शैलेन्द्र झा, नीरज गोयल, मुस्कान चोपड़ा, डालसा सहायक अरुण कुमार, सौरव सरकार, अनुराग पांडेय, विजय कुमार आदि उपस्थित थे.

दिया गया निर्देश

सभी बंदियों का वर्तमान डेटा जेल के पैरा लीगल वॉलिंटियर (विधिक स्वंयसेवक ) के माध्यम से कंप्यूटर पर फीड करायी जाये.

वैसे बंदी जो कई मुकदमों में जेल में बंद हैं, उनके साथ नये बंदियों को नहीं रखा जाये.

पढ़ाई करने की इच्छुक बंदियों को समुचित शिक्षा की व्यवस्था करायी जाये.

जेल में स्कैनर का समुचित प्रयोग करने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बंदियों को न्यायालय में पेश करने के लिए हाइटेक आवश्यक उपकरणों को लगाया जाये. जेल मैनुअल के तहत मिलने वाली सारी सुविधाएं बंदियों को उपलब्ध करायें.

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