ePaper

Dhanbad News: ना नियमित शिक्षक, ना छात्र, कागज पर चल रही मध्यमा की पढ़ाई

Updated at : 01 Feb 2026 2:38 AM (IST)
विज्ञापन
Dhanbad News: ना नियमित शिक्षक, ना छात्र, कागज पर चल रही मध्यमा की पढ़ाई

Dhanbad News: हाल राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय का, पांच विद्यार्थी हैं नामांकित, चार घर से कर रहे तैयारी

विज्ञापन

Dhanbad News: हाल राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय का, पांच विद्यार्थी हैं नामांकित, चार घर से कर रहे तैयारी

Dhanbad News: मनोज रवानी, धनबाद.

भिस्तीपाड़ा स्थित एचइ स्कूल परिसर में वर्ष 1953 से संचालित राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय में ना तो कोई नियमित शिक्षक हैं और ना ही रोज स्कूल आने वाले विद्यार्थी. रजिस्टर पर चार बच्चों का नाम तो हैं. लेकिन, क्लास करने नहीं आते. केवल कागज पर ही मध्यमा की पढ़ाई हो रही है. इस विद्यालय में दसवीं (मध्यमा) में पांच विद्यार्थी नामांकित हैं. इसमें से चार छात्रों के परिजनों ने लिखित दिया है कि उनके बच्चे घर में रहकर पढ़ाई करेंगे और अपने बच्चों को ले गये. वहीं एक छात्र ने पढ़ाई छोड़ दी है.

नौवीं व दसवीं की होती है पढ़ाई

इस संस्कृत विद्यालय में नौवीं व दसवीं (मध्यमा) तक की पढ़ाई होती है, लेकिन विभागीय अनदेखी के कारण यहां एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है. विद्यालय में प्रतिनियोजित पर वर्ष 2024 तक पढ़ाई हुई. लेकिन प्रतिनियोजित शिक्षक अर्जुन प्रसाद पांडेय के सेवानिवृत्त होने के बाद विद्यालय को कोई शिक्षक नहीं मिला. इससे विद्यालय में पढ़ाई बंद हो गयी. एक शिक्षक सितंबर माह में आये और डेढ़ माह में ही वापस चले गये. विभागीय उपेक्षा के कारण विद्यालय में नामांकन का स्तर गिरता गया. नौवीं कक्षा में एक भी छात्र नामांकित नहीं हैं.

एचइ स्कूल के प्रभारी को संस्कृत विद्यालय का प्रभार

एचइ स्कूल के प्रभारी राजेश कुमार को संस्कृत विद्यालय का प्रभार दे दिया गया है. लेकिन, यहां पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है. शनिवार को प्रभात खबर की टीम स्कूल पहुंची, तो एचइ स्कूल के कक्षा में दूसरे बच्चों के साथ संस्कृत विद्यालय का छात्र पढ़ाई करता मिला. लेकिन यह छात्र दूसरी बार परीक्षा की तैयारी कर रहा है. वह नियमित क्लास भी कर रहा है.

पहले 17 कमरे में संचालित था विद्यालय

दुमका में आरडीडी रह चुके गोपाल कृष्ण झा वर्ष 2019 तक संस्कृत विद्यालय में प्रधानाध्यापक रहे. 2019 में उन्हें डायट का प्रभारी बना दिया गया, फिर जिला शिक्षा पदाधिकारी दुमका के बाद वह आरडीडी बन गये. वह बताते हैं कि पहले खपरैल कमरे में विद्यालय का संचालन होता था. तब 17 कमरे थे. श्री झा के अनुसार झारखंड अलग राज्य बनने के बाद इस राज्य के हिस्से छह संस्कृत विद्यालय आये.

शिक्षकों का पद रिक्त, सिर्फ लेखापाल व आदेशपालक हैं

संस्कृत विद्यालय में वैद्य, व्याकरण, ज्योतिष, साहित्य, हिंदी, एसएसटी, गणित, विज्ञान, अंग्रेजी व क्षेत्रीय भाषा के शिक्षक के पद हैं. इसके अलावा प्रयोगशाला के लिए एक, लेखापाल व आदेशपालक का एक पद है. विद्यालय में कुल 14 पद हैं, लेकिन वर्तमान में यहां सिर्फ लेखापाल व आदेशपालक हैं.

विद्यालय में सैकड़ों पुरानी किताबें व पांडुलिपियां हैं

संस्कृत विद्यालय में काफी पुरानी किताबें, ग्रंथ और महत्वपूर्ण पांडुलिपियां हैं. विद्यालय में करीब 600 से 700 किताबें हैं.

बच्चों के अभाव में प्रतिनियोजन हुआ रद्द : डीइओ

संस्कृत विद्यालय से परिजन ने स्वेच्छा से अपने बच्चों को ले गये हैं. इस विद्यालय में प्रतिनियोजन पर शिक्षक लगाये गये थे. लेकिन बच्चों की संख्या काफी कम होने के कारण शिक्षक का प्रतिनियोजन वापस हो गया. एचइ स्कूल के प्रधानाध्यापक राजकीय संस्कृत विद्यालय के प्रभार में हैं.

अभिषेक झा, जिला शिक्षा पदाधिकारी

विज्ञापन
OM PRAKASH RAWANI

लेखक के बारे में

By OM PRAKASH RAWANI

OM PRAKASH RAWANI is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola