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Health News: बच्चों के स्वास्थ्य में असामान्य बदलाव नहीं करें नजरअंदाज

Updated at : 22 Aug 2025 8:40 PM (IST)
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Health News Dhanbad Jharkhand Dr Umendra Kumar

प्रभात खबर के मेडिकल काउंसलिंग में ऑनलाइन सलाह देते डॉ उमेंद्र कुमार. फोटो : प्रभात खबर

Health News: धनबाद के प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ उमेंद्र कुमार ने अभिभावकों को सुझाव दिया है कि वे बच्चों के स्वास्थ्य में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें. प्रभात खबर की ओर से शुक्रवार को आयोजित प्रभात खबर ऑनलाइन मेडिकल काउंसेलिंग में उन्होंने यह बात कही. कहा कि अगर असामान्य बदलाव दिखे, तो तुरंत शिशु रोग विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Health News: बच्चों में अक्सर भूख न लगना माता-पिता के लिए चिंता का विषय बन जाता है. भूख कम होना कई बार सामान्य कारणों से जुड़ा होता है, लेकिन यह कुछ बीमारियों का भी संकेत हो सकता है. एक से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों में भूख न लगने की समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है. इसके पीछे मुख्य कारण पाचन तंत्र की गड़बड़ी, खून की कमी (एनीमिया), बार-बार होने वाला संक्रमण, दांत निकलना, थायरॉयड संबंधी परेशानी या मानसिक तनाव हो सकते हैं.

यदि बच्चे को लगातार कई दिनों तक भूख न लगे, वजन कम होने लगे या बार-बार उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत हो, तो तुरंत शिशु रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए. यह सुझाव शुक्रवार को प्रभात खबर ऑनलाइन मेडिकल काउंसेलिंग में शहर के प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ उमेंद्र कुमार ने दिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि बच्चों को संतुलित आहार दें. भोजन में हरी सब्जियां, मौसमी फल, दाल, दूध और पौष्टिक अनाज शामिल करें. जंक फूड और तैलीय भोजन से बचाने की कोशिश करें.

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साथ ही बच्चों को खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में शामिल करने से उनका पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है और भूख भी सामान्य रूप से लगती है. समय पर टीकाकरण और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने से कई मौसमी बीमारियों से बचाव संभव है. माता-पिता को बच्चों के स्वास्थ्य में किसी भी असामान्य बदलाव को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए.

  • प्रभात खबर ऑनलाइन मेडिकल काउंसेलिंग में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ उमेंद्र कुमार ने दी सलाह
  • बच्चों में भूख की कमी, वजन कम होना, उल्टी, बुखार की समस्या होने पर शिशु रोग चिकित्सक से करें परामर्श

कतरास से रविलोचन दे ने पूछा : 19 दिन के नवजात के शरीर में फुंसी हो गयी है.

डॉक्टर : सबसे पहले तो बच्चे को सरसो व केमिकलयुक्त तेल लगाना बंद करें. जरूरत के अनुसार नारियल का तेल लगायें. बच्चे का शरीर दिन में दो बार साफ पानी से पोछें. शिशु रोग विशेषज्ञ के परामर्श से कुछ क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं.

बरमसिया से दीक्षा प्रिया ने पूछा : कुछ दिन पहले बच्चे को बुखार था. दो दिनों से लूज मोशन की समस्या है.

डॉक्टर : सबसे पहले बच्चे को ओआरएस देना शुरू करें. एक लीटर पानी में ओआरएस का बड़ा पैकेट घोल कर बच्चे को दिनभर में थोड़ा-थोड़ा पीने के लिए दें. इसके साथ जिंक की दवा भी दें. इससे राहत मिलेगी.

बाकारो के नावाडीह से लोकेश्वर महतो ने पूछा : 10 साल का बच्चा है. खाना खाने में आनाकानी करता है. इससे शरीर भी दुबला है.

डॉक्टर : बच्चे को संतुलित आहार देने की कोशिश करें, वह भी तब, जब वह खाना चाहता है. इसके साथ पेट में कीड़े की दवा के साथ भूख की दवा चिकित्सक की परामर्श से दे सकते हैं. इससे असर नहीं हुआ, तो कुछ जांच करानी होगी.

पूर्वी टुंडी से दिलीप मरांडी ने पूछा : दो साल की बेटी है. खाना बहुत कम खाती है.

डॉक्टर : बच्चों को भूख लगेगी, तो खुद खाना मांगेंगे. प्रयास करें कि बच्चे की रुचि के अनुसार खाने के लिए दें. इसके अलावा चिकित्सक की सलाह पर भूख लगने की दवा दें सकते है. इससे निश्चित रूप से लाभ होगा.

पिंड्राजोड़ा से राम विलास महतो ने पूछा : पांच साल के बच्चे के पैर में मस्सा हो गया है.

डॉकटर : पैरों में मस्सा कई कारणों से हो सकता है. इसके लिए बेहतर होगा की सर्जन चिकित्सक से परामर्श लें. कुछ दवाओं के जरिए मस्से की समस्या को दूर की जा सकती है.

झरिया से रविंद्र कुमार ने पूछा : रात में सोने के बाद बच्चा झटका लेता है, दवा चल रही है पर बच्चा काफी जिद्दी हो गया है.

डॉक्टर : बीमारी का पता लगाने के लिए सबसे पहले सीटी स्कैन कराना होगा. दवा देने के बावजूद झटका आने की समस्या बनी रहती है, तो दवा का डोज सेट करना जरूरी है. बच्चे के दिमाग में समस्या होने की वजह से वह झटका ले रहा है. ऐसे में उसे डांटने से समस्या जटिल हो सकती है. प्रयास करें कि बच्चे से अच्छे से पेश आयें.

भिस्तीपाड़ा से आकांक्षा ने पूछा : सात साल का बच्चा है. मौसम बदलने से वह बार-बार बीमार हो जाता है?

डॉक्टर : बच्चे का इम्युन कमजोर होने की वजह से ऐसा हो सकता है. कुछ जांच के बाद बीमारी का पता लगाया जा सकता है. वर्तमान में बच्चे को गुनगुना पानी पीने के लिए दें. रोजाना गुनगुना पानी से गार्गल करायें. चिकित्सक की सलाह पर कुछ एंटीबायोटिक्स दे सकती हैं.

भूली से दिनेश नापित ने पूछा : 12 साल की बेटी है. अब भी बेड पर ही शौच कर देती है.

डॉक्टर : कुछ नियमों का पालन कर इस समस्या को दूर किया जा सकता है. सबसे पहले शाम के पांच बजे के बाद बच्ची को कुछ भी पीने के लिए नहीं दें. खासकर चॉकलेट, कॉफी, कोल्डड्रिंक बिल्कुल न दें. सोने से पहले यूरिन करवायें. कुछ दिनों तक यह फॉर्मूला अपनायें. इससे भी समस्या दूर नहीं हुई, तो बेड अलार्म थेरेपी देना फायदेमंद होगा.

गिरिडीह से नेहा कुमारी ने पूछा : तीन साल का बच्चा है. उसे साफ बोलने में परेशानी होती है?

डॉक्टर : यह स्पीच डिले की समस्या है. इससे घबराने की जरूरत नहीं है. बच्चे से ज्यादा से ज्यादा बात करें. जो भी बोले वह धीरे-धीरे. छोटे-छोटे शब्दों में बच्चे से बात करने का प्रयास करें. बच्चे के सामने शब्दों को दोहरायें. इससे बच्चा जल्दी और साफ बोलना सीखने लगेगा.

हीरापुर से संजय कुमार पांडेय ने पूछा : बेटी की उम्र 10 साल हो गयी है. उम्र के हिसाब से हाइट काफी कम है.

डॉक्टर : सबसे पहले बच्ची के वजन का पता लगाना जरूरी है. वजन के तुलना में हाइट का अनुमान लगाया जा सकता है. वजन के अनुसार हाइट कम है, तो कुछ जांच कराना होगा. इस दौरान बच्ची को कुछ कैल्शियम और विटामिन की दवाएं दे सकते हैं.

धनबाद से अजय कुमार ने पूछा : बच्चे को डायरिया से बचाने के लिए कौन सा टीका लगाना चाहिए?

डॉक्टर : आम तौर पर बच्चे को डायरिया से बचाव के लिए रोटावायरस टीका लगाया जाता है. यह टीका बच्चे के जन्म के छह, 10 व 14 सप्ताह पर दिया जाता है. यह डायरिया से बचाव के लिए कारगर उपाय है.

सरायढेला से सुनीता पटेल ने पूछा : छह साल का नाती है. उसे मोशन में समस्या है?

डॉक्टर : स्कूल जाने वाले बच्चों में यह आम समस्या है. इसकी मुख्य वजह बच्चों का कम पानी पीना है. स्कूल में बच्चे कम पानी पीते हैं, इससे उन्हें यह समस्या होती है. प्रयास करें कि घर आने के बाद बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के लिए दें. खाने में फल, सब्जियां और हाइ फायइबर युक्त डायट शामिल करें. इसके बाद भी समस्या दूर नहीं हुई, तो चिकित्सक की परामर्श लें.

सहयोगी नगर से मनोज कुमार सिंह ने पूछा : बच्चों को मौसमी बीमारियों से कैसे बचाएं?

डॉक्टर : मौसमी बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए सबसे पहले सफाई पर ध्यान देना आवश्यक है. इसके अलावा बच्चों को पानी उबाल कर ठंडा होने के बाद दें. पोषण का ख्याल रखें. इससे काफी हद तक मौसमी बीमारियों से बचाव संभव है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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