धनबाद में सांस लेना भी खतरनाक, झारखंड में बना सबसे प्रदूषित शहर

Updated at : 25 Mar 2026 10:24 AM (IST)
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Dhanbad Pollution

धनबाद में फैलता प्रदूषण. फोटो: प्रभात खबर

Dhanbad Pollution: धनबाद झारखंड का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जहां 2025 में एक्यूआई 124 और पीएम2.5 स्तर बेहद खतरनाक दर्ज हुआ. कोयला खनन, वाहनों और औद्योगिक गतिविधियों से प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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धनबाद से अशोक कुमार की रिपोर्ट

Dhanbad Pollution: धनबाद की पहचान भले ही देश की कोयला राजधानी के रूप में हो, लेकिन अब यह पहचान तेजी से प्रदूषण की राजधानी में बदलती दिख रही है. स्विट्जरलैंड की वायु गुणवत्ता प्रौद्योगिकी कंपनी ‘आईक्यूएयर’ की आठवीं वैश्विक रिपोर्ट ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है. रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2025 में धनबाद का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 124 रहा, जो झारखंड में सबसे अधिक है. वहीं पीएम 2.5 का स्तर 44.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षित मानक से करीब नौ गुना ज्यादा है. यह स्थिति सीधे तौर पर यहां के लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालने वाली है.

धनबाद के इन 12 क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता बहुत खराब

‘आईक्यूएयर’ की आठवीं वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के सभी 24 जिलों के 73 आबादी वाले क्षेत्रों का अध्ययन किया गया, जिसमें धनबाद जिले के 12 इलाके प्रमुख रूप से शामिल हैं. ये सभी क्षेत्र खनन, कोयला परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों से सीधे प्रभावित हैं. धनबाद शहरी क्षेत्र के साथ-साथ झरिया, जोड़ापोखर, जामाडोबा, मुगमा, निरसा, गोविंदपुर, सिजुआ, कतरास, मलकेरा, गोमो और तोपचांची को इस सूची में रखा गया है. इनमें भी अधिकतर क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पायी गयी. हालांकि, तोपचांची अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा, जहां 2025 में औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 106 दर्ज किया गया, जो अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम है, लेकिन फिर भी सुरक्षित स्तर से ऊपर है.

क्या कहते हैं आंकड़े

औसत एक्यूआई (धनबाद): 124
पीएम 2.5 : 44.9 µg/m³
डब्ल्यूएचओ सुरक्षित मानक : 5 µg/m³ (वार्षिक औसत)

क्यों बिगड़ रही है धनबाद की हवा

विशेषज्ञों का मानना है कि धनबाद में बढ़ता प्रदूषण कई कारणों का संयुक्त परिणाम है. सबसे बड़ा कारण यहां का खनन आधारित अर्थतंत्र है, जहां कोयला खनन, ढुलाई और स्टॉकिंग के दौरान बड़ी मात्रा में धूल और कण वातावरण में फैलते हैं.

  • 2011 की जनगणना के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व 4200 प्रति वर्ग किमी तक पहुंच गया है. जिले का औसत जनसंख्या घनत्व 1316 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है
  • वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि
  • सड़कों पर उड़ने वाली धूल और निर्माण कार्य
    -औद्योगिक इकाइयों से उत्सर्जन

झारखंड के सबसे प्रदूषित शहर (एक्यूआई 2025)

  • धनबाद : 124
  • पाकुड़ : 116
  • साहिबगंज : 116
  • चाईबासा : 114
  • चांडिल : 114

जहां अब भी मिलती है राहत

नेतरहाट, बरवाडीह, गढ़वा और मेदिनीनगर जैसे इलाकों में एक्यूआइ 97 के आसपास रहा, जबकि हुसैनाबाद और लातेहार में यह 98 दर्ज किया गया. इन क्षेत्रों में हवा अपेक्षाकृत बेहतर रहने के पीछे प्रमुख कारण घना हरित आवरण, सीमित औद्योगिक गतिविधियां और कम जनसंख्या दबाव हैं.

एसएनएमएमसीएच के अधीक्षक डॉ डीके गिंदौरिया बोले

  • पीएम 2.5 का उच्च स्तर फेफड़ों और हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ाता है
  • अस्थमा, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस के केस बढ़ रहे
  • बच्चों और बुजुर्गों में फेफड़ों की क्षमता पर असर पड़ रहा
  • लंबे समय में जीवन प्रत्याशा पर भी प्रभाव
  • दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है

कैसे सुधर सकते हैं हालात

  • खनन क्षेत्रों में डस्ट कंट्रोल सिस्टम को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता
  • सड़कों पर नियमित पानी छिड़काव हो
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट और ई-वाहनों को बढ़ावा मिले
  • ग्रीन कवर (पेड़-पौधे) को बढ़ाना होगा
  • इंडस्ट्रियल एमिशन पर और सख्ती की आवश्यकता

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट

बीबीएमकेयू में एनवायरनमेंट एंड डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ एसके सिन्हा के अनुसार, एयर क्वालिटी इंडेक्स में वृद्धि के पीछे पीएम 2.5 की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि ये अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं और लंबे समय में मौजूद रहते हैं. जब वातावरण में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ता है, तो एक्यूआइ स्वतः ही खराब श्रेणी में पहुंच जाता है. इसके बढ़ने के प्रमुख कारणों में वाहनों से निकलने वाला धुआं और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ऊर्जा खपत का अधिक होना शामिल है. अधिक जनसंख्या वाले इलाकों में निर्माण कार्य, ट्रैफिक और ईंधन का उपयोग भी प्रदूषण को बढ़ाते हैं. धनबाद शहरी क्षेत्र में इस स्थिति के लिए, यहां के आसपास के कोयला उद्योग, क्रशर और खनन गतिविधियां भी जिम्मेवार हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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