जमीन जिप की, दुकानें बना कर बेच रहा निगम

Updated at : 30 Jul 2019 4:55 AM (IST)
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जमीन जिप की, दुकानें बना कर बेच रहा निगम

10 लाख रुपये में हुई तीन दुकानों की बंदोबस्ती धनबाद : माल महाराज का, मिर्जा खेले होली वाली कहावत धनबाद में चरितार्थ हो रही है. जमीन जिला परिषद की, दुकानें बना कर लाखों में बेच रहा धनबाद नगर निगम. वह भी शहर के महंगे इलाके में. इससे तिलमिलाये जिला परिषद अध्यक्ष रोबिन चंद्र गोराईं ने […]

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10 लाख रुपये में हुई तीन दुकानों की बंदोबस्ती

धनबाद : माल महाराज का, मिर्जा खेले होली वाली कहावत धनबाद में चरितार्थ हो रही है. जमीन जिला परिषद की, दुकानें बना कर लाखों में बेच रहा धनबाद नगर निगम. वह भी शहर के महंगे इलाके में. इससे तिलमिलाये जिला परिषद अध्यक्ष रोबिन चंद्र गोराईं ने सीइओ सह डीडीसी को अविलंब निगम द्वारा निर्मित दुकानों को तोड़वाने को कहा है.

क्या है मामला : शहर के राजेंद्र सरोवर की मुख्य सड़क तथा बगल वाले छोर के किनारे नगर निगम की तरफ से कुल 13 दुकानें बनायी गयी हैं. इन दुकानों की बंदोबस्ती भी निगम की तरफ से करायी गयी. सामने वाली दुकानों की बंदोबस्ती तो हो गयी, लेकिन किनारे वाली दुकानों के खरीदार सामने नहीं आये. सामने वाली तीन दुकानों की बंदोबस्ती दस लाख रुपये सुरक्षित जमा राशि के अलावा 44 सौ मासिक किराया पर कीगयी. जबकि किनारे वाली 10 दुकानों के लिए पांच लाख रुपये सुरक्षित राशि रखी गयी थी. इन दुकानों के लिए किसी ने रुचि नहीं दिखायी. जिस जमीन पर दुकानें बनी हैं, वह जिला परिषद की है. इस तालाब की बंदोबस्ती वर्षों से जिला परिषद ही करती आ रही है.

सौंदर्यीकरण को लेकर भी हुआ था विवाद : राजेंद्र सरोवर का सौंदर्यीकरण धनबाद नगर निगम द्वारा कराया गया है. तालाब के एक छोर पर पार्क भी बनाया गया है. निर्माण को लेकर भी जिला परिषद एवं नगर निगम के बीच काफी विवाद हुआ था. एक बार तो जिला परिषद एवं निगम कर्मियों के बीच मारपीट तक हो गयी थी. बाद में उपायुक्त के हस्तक्षेप पर जिला परिषद बोर्ड ने सिर्फ सौंदर्यीकरण व पार्क बनाने के लिए नगर निगम को एनओसी दिया. पार्क का मेंटेनेंस भी नगर निगम की तरफ से किया जा रहा है. आम लोगों से प्रवेश शुल्क लिया जा रहा है.

जिप को राजस्व का नुकसान : राजेंद्र सरोवर के किनारे दुकानें बना कर निगम द्वारा बेचे जाने व किराया वसूले जाने से जिला परिषद को राजस्व का नुकसान हो रहा है. साथ ही संपत्ति पर जिला परिषद के स्वामित्व पर सवालिया निशान लग रहा है.

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