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धनबाद : दो करोड़ का टेंडर, चार घंटे गेट पर बैठे रहे नगर आयुक्त

Updated at : 03 Feb 2019 9:58 AM (IST)
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धनबाद : दो करोड़ का टेंडर, चार घंटे गेट पर बैठे रहे नगर आयुक्त

कमजोर संवेदकों ने की थी डीसी से शिकायत, निर्देश मिला भयरहित वातावरण और पारदर्शिता का धनबाद : नगर निगम में छोटे व कमजोर संवेदकों को टेंडर में भाग लेने से रोकने की मंशा को विफल करने और पारदर्शिता बरतने के उपायुक्त के आदेश पर नगर आयुक्त चंद्र मोहन कश्यप व अपर नगर आयुक्त महेश संथालिया […]

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कमजोर संवेदकों ने की थी डीसी से शिकायत, निर्देश मिला भयरहित वातावरण और पारदर्शिता का
धनबाद : नगर निगम में छोटे व कमजोर संवेदकों को टेंडर में भाग लेने से रोकने की मंशा को विफल करने और पारदर्शिता बरतने के उपायुक्त के आदेश पर नगर आयुक्त चंद्र मोहन कश्यप व अपर नगर आयुक्त महेश संथालिया को चार घंटे तक लुबी सर्कुलर रोड स्थित कार्यालय के गेट पर बैठना पड़ा.
दो करोड़ के काम के लिए एनआइटी 91 में 19 ग्रुप और 92 में 2 ग्रुप के लिए शनिवार को टेंडर डालने की तारीख थी. लेकिन बड़े व दबंग संवेदकों के कमजोर संवेदकों को पहले ही भयभीत करने को लेकर मामला तूल पकड़ दिया. डीसी से शिकायत की गयी. इसके बाद निगम के दोनों अधिकारी 11 बजे से तीन बजे तक निगम गेट के बाहर कुर्सी लगाकार डटे रहे.
पूछताछ के बाद जाने दे रहे थे अंदर : नगर आयुक्त व अपर नगर आयुक्त टेंडर डालने आये हर किसी से पूछताछ कर रहे थे. यह भी पूछा गया कि कोई डरा या धमका तो नहीं रहा.
झुंड में आये संवेदकों को रोक दिया गया. केवल टेंडर डालने वाले को ही अंदर जाने दिया जा रहा था. इस कारण बाहर लोग खड़े रहे. टेंडर डालने का समय पूर्वाह्न 11 बजे से तीन बजे तक था. इसने समय तक दोनों पदाधिकारी बाहर बैठे रहे. टेंडर के अलावा अन्य दूसरे काम से आये लोगों से भी पूछताछ की जा रही थी.
लगभग दो करोड़ से बननी है नाली-सड़क : एनआइटी 91 व 92 मिलाकर 21 ग्रुप की योजना है. 21 ग्रुप का मतलब सामान्यत: 21 वार्ड से हैं. इन वार्डों में छोटे-मोटे काम होने हैं. नालियां व सड़कें भी बननी हैं. बताया जाता है कि पांच फरवरी को भी 28 ग्रुप के लिए टेंडर भरे जायेंगे.
बड़े व दबंग संवेदकों का है बोलबाला
नगर निगम के छोटे व कमजोर संवेदकों का कहना है कि बड़े व दबंग संवेदकों का बोलबाला है. वह धमकाकर या रास्ता रोक कर खड़े हो जाते हैं. टेंडर डालने जाने वाले छोटे संवेदकों के इनवेलप ले लेते हैं. उसे टेंडर नहीं डालने की धमकी दी जाती है. इस कारण संबंधित योजना या ग्रुप में कोई दूसरा टेंडर नहीं डाल पाता है. आरोप यह भी लगता है कि टेंडर प्रक्रिया भी पारदर्शी नहीं होती है. दूसरी ओर नगर आयुक्त ने बताया कि टेंडर पारदर्शी होगा. दस दिनों के अंदर सभी प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी.
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