धनबाद : दो करोड़ खर्च, फिर भी नहीं हुआ कंप्यूटराइज्ड

Updated at : 23 Dec 2018 9:23 AM (IST)
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धनबाद : दो करोड़ खर्च, फिर भी नहीं हुआ कंप्यूटराइज्ड

केवल रजिस्ट्रेशन ही हो पा रहा कंप्यूटराइज्ड 2015 में पीएमसीएच को करना था कंप्यूटराइज्ड धनबाद : पीएमसीएच में दो करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद कंप्यूटराइज्ड सेवा नहीं शुरू हो पायी है. रजिस्ट्रेशन काउंटर की बात छोड़ दे तो बाकी सभी जांच व इलाज की रिपोर्ट आदि मैनुअल ही दी जाती है. कंप्यूटराइज्ड सेवा के […]

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केवल रजिस्ट्रेशन ही हो पा रहा कंप्यूटराइज्ड
2015 में पीएमसीएच को करना था कंप्यूटराइज्ड
धनबाद : पीएमसीएच में दो करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद कंप्यूटराइज्ड सेवा नहीं शुरू हो पायी है. रजिस्ट्रेशन काउंटर की बात छोड़ दे तो बाकी सभी जांच व इलाज की रिपोर्ट आदि मैनुअल ही दी जाती है. कंप्यूटराइज्ड सेवा के लिए खरीदे गये उपकरण व कंप्यूटर भी खराब होकर कोने में में शोभा बढ़ा रहे हैं.
बता दें कि 12 अप्रैल 2015 को स्वास्थ्य मंत्री ने कंप्यूटराइज्ड रजिस्ट्रेशन काउंटर का उद्घाटन किया था. 2015 में पीएमसीएच में सभी ओपीडी व इंडोर सेवाओं को कंप्यूटराइज्ड करने की घोषणा की थी. इसके लिए दो करोड़ रुपये से रजिस्ट्रेशन काउंटर शुरू किया गया था. कई उपकरण व कंप्यूटर भी खरीदे गये थे.
मैनुअल पर एमसीआइ ने जतायी थी नाराजगी : पीएमसीएच में मैनुअल कार्य से इलाज व इंडोर सेवा पर एमसीआइ ने नाराजगी जतायी थी. समान्यत: मेडिकल कॉलेज व अस्पताल को कंप्यूटराइज्ड सेवा से जुड़ा होना चाहिए. एमसीआइ की नाराजगी के बाद 2015 में कंप्यूटराइज्ड सेवा से जोड़ने की कोशिश की गयी थी. इसके लिए जोर-शोर से काम शुरू किया गया. लेकिन इसके बाद इसमें ब्रेक लग गया.
कंप्यूटराइज्ड सेवा से क्या होता फायदा : कंप्यूटराइज्ड सेवा के तहत पीएमसीएच के रजिस्ट्रेशन काउंटर, ओपीडी से सभी विभाग, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, इंडोर, आइसीयू, एचडीयू एक दूसरे से जुड़े होते. पीएमसीएच में आने वाले मरीजों का एक रजिस्टेशन नंबर काउंटर से मिलता है. इसके बाद कंप्यूटराइज्ड सेवा नहीं होने से इस रजिस्ट्रेशन नंबर का प्रयोग नहीं हो पाया है.
सेवा होने से मरीज का केवल रजिस्ट्रेशन नंबर से उसकी इंट्री कर दी जाती. इसके साथ केस हिस्ट्री की भी जानकारी चिकित्सक को मिल जाती. एक वर्ष के पूर्व आने के बाद भी रजिस्ट्रेशन नंबर से मरीज को क्या-क्या दवा दी गयी थी, क्या देनी है. बीमारी में कब, क्या दवाएं दी गयी थी, इसकी भी जानकारी मिल पाती. लेकिन ऐसे नहीं हो रहा है.
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