धनबाद : पारा शिक्षकों की न्याय यात्रा में उमड़ा सैलाब
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Dec 2018 10:23 AM
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बड़ी संख्या में पारा शिक्षक पत्नी बच्चों के साथ हुए शामिल मांग नहीं पूरा करने पर सरकार उखाड़ फेंकने की दी धमकी धनबाद : छत्तीसगढ़ की तर्ज पर स्थायीकरण, समान काम का समान वेतन आदि मांगों को लेकर हड़ताली पारा शिक्षकों ने शनिवार को यहां न्याय यात्रा निकाली. आज बेमियादी हड़ताल का 23 वां दिन […]
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बड़ी संख्या में पारा शिक्षक पत्नी बच्चों के साथ हुए शामिल
मांग नहीं पूरा करने पर सरकार उखाड़ फेंकने की दी धमकी
धनबाद : छत्तीसगढ़ की तर्ज पर स्थायीकरण, समान काम का समान वेतन आदि मांगों को लेकर हड़ताली पारा शिक्षकों ने शनिवार को यहां न्याय यात्रा निकाली.
आज बेमियादी हड़ताल का 23 वां दिन था. न्याय यात्रा में बड़ी संख्या में पारा शिक्षकों के साथ उनकी पत्नी और बच्चे भी शामिल थे. यह गोल्फ ग्राउंड से शुरू हुई और कंबाइड बिल्डिंग, पूजा टॉकिज , कोर्ट मोड़ हेते हुए रणधीर वर्मा चौक पर पहुंची. रणधीर वर्मा चौक पर आक्रोश सभा हुई. अपने संबोधन में एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के जिलाध्यक्ष अश्विनी कुमार सिंह ने कहा कि अंधी-बहरी सरकार के लूल्हे-लंगड़े पदाधिकारी हो गये हैं.
उन्हें पारा शिक्षकों की हड़ताल से 130 विद्यालय ही बंद दिख रहे हैं. जबकि जिले के 694 विद्यालय पूर्ण रूप से 23 दिनों से बंद हैं. राज्य के 20 लाख और जिले के 50 हजार बच्चे प्राथमिक शिक्षा एवं मध्याह्न भोजन से वंचित हो चुके हैं. अगर हमारी मांगें नहीं मानी गयी तो हम सरकार को उखाड़ फेंकेंगे.
जिला सचिव मो. शेख सिद्दिकी ने कहा कि झारखंड सरकार हमें 16 वर्ष की मेहनत का उपाहर दे रही है. पारा शिक्षकों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है. अगर सरकार हमारी मांग नहीं मानती है तो हम भी बर्बाद होने को तैयार हैं. नये प्राथमिक विद्यालय की चाबी हमारे पास है. हम विद्यालय खोलने में सरकार का कोई सहयोग नहीं करेंगे. झारखंड प्रदेश एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले निकली न्याय यात्रा में तोपचांची, गोमो, कतरास, महुदा, बिराजपुर, पुटकी, भागा, बलियापुर, केलियासोल, निरसा बाजार, लटानी आदि से पारा शिक्षक शामिल हुए.
मुखिया संघ व कांग्रेस ने दिया समर्थन : मोर्चा ने न्याय यात्रा में राजनीतिक दलों व मुखिया संघ का समर्थन मांगा था. मौके पर मौजूद मुखिया संघ के अध्यक्ष संजय महतो ने कहा कि अधिकार मांगने पर अगर लाठी मिले और लाठी का विरोध करने पर उन्हें गुंडा कहा जाये तो ऐसी सरकार राज्य का विनाश कर देगी. सरकार किसी की मांग सुनने को तैयार नहीं है. चाहे वह मुखिया संघ हो या पारा शिक्षक. आजे के आंदोलन में कांग्रेस के विजय सिंह, मयूर शेखर झा, मदन महतो, शमशेर आलम, उत्तम मिश्रा, जबकि मुखिया संघ के संजय महतो, मनोज हाड़ी, विकास महतो आदि मौजूद थे.
ये भी थे शामिल : पारा शिक्षकों की ओर से अभिलाषा झा, प्रसन्न सिंह, ब्रज मोहन पाठक, अशोक चक्रवर्ती, अताउर अंसारी, दुर्गा चरण महतो, निरंजन दे, मनोज राय, रवींद्र महतो, रंजीत मंडल, तुलसी महतो, सुशील पांडेय, नवीन सिंह, सुजोय रक्षित, नीलांबर रजवार, साजिद शेख, बलराम महतो, प्रकाश तिवारी, मुख्तार अंसारी, पतित पावन चौधरी, करीम अंसारी, सुदाम भंडारी, वरुण मंडल, जीतेंद्र कुमार सिंह, अक्षय सिंह, हारू रवानी, प्रीति सिंह, प्रतिमा देवी, सुनीता कुमारी, नीलू कुमारी, सरिता सोनकर, लालसा कुमारी, सुमन लता पांडेय, नूरी खातून, निलोफर नाज, राबिया खातून, हसीना खातून, जहांआरा बेगम, अनिता देवी, पिंकी देवी, सुनीता देवी, इकबाल अहमद, पार्थो सूत्रधार, तरुण कुमार, इरफान अंसारी, मंगल महतो, आलोक बैनर्जी, नंदकिशोर पाल, सुदामा महतो, महमूद अंसारी सहित बड़ी संख्या में पारा शिक्षक शामिल थे.
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