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धनबाद : उत्पादन-डिस्पैच में बढ़ोतरी को लेकर कोयला मंत्रालय गंभीर

Updated at : 01 Dec 2018 9:48 AM (IST)
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धनबाद : उत्पादन-डिस्पैच में बढ़ोतरी को लेकर कोयला मंत्रालय गंभीर

धनबाद : कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी बीसीसीएल की आर्थिक स्थिति गंभीर है. कंपनी लगातार अपने उत्पादन-डिस्पैच लक्ष्य से पिछड़ती जा रही है. वर्तमान स्थिति यह कि कंपनी अपने लक्ष्य का 45 फीसदी भी उत्पादन नहीं कर पा रही है. बीसीसीएल को वर्तमान में 1.72 लाख टन कोयला उत्पादन करना है, लेकिन कंपनी पिछले दो […]

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धनबाद : कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी बीसीसीएल की आर्थिक स्थिति गंभीर है. कंपनी लगातार अपने उत्पादन-डिस्पैच लक्ष्य से पिछड़ती जा रही है. वर्तमान स्थिति यह कि कंपनी अपने लक्ष्य का 45 फीसदी भी उत्पादन नहीं कर पा रही है.
बीसीसीएल को वर्तमान में 1.72 लाख टन कोयला उत्पादन करना है, लेकिन कंपनी पिछले दो सप्ताह से औसतन 70 हजार टन कोयला उत्पादन कर रही है. वहीं ओवर बर्डेन (ओबी) निकासी भी पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम हुआ है. ऐसे में चालू वित्तीय वर्ष में कंपनी अपने वार्षिक लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम नहीं दिख रही है. मामले को गंभीरता से लेते हुए कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव भवानी प्रसाद पाती ने बीसीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह को पत्र लिख कर चिंता व्यक्त की है. स्थिति में सुधार को लेकर कई सुझाव भी दिये है.
पुराने स्टॉक को डिस्पैच करे : संयुक्त सचिव श्री पाती ने कहा कि पिछले दो वर्षों से बीसीसीएल घाटे में चल रही है. चालू वित्तीय वर्ष के छहमाही में भी कंपनी निगेटिव में चल रही है. कंपनी की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए वार्षिक लक्ष्य को प्राप्ति कर आवश्यक है. इसलिए उन्होंने लक्ष्य के मुताबिक कोयला उत्पादन-डिस्पैच करने के निर्देश दिये हैं, ताकि स्थिति में सुधार हो सके.
वाशरी के परिचालन पर विशेष ध्यान दे बीसीसीएल
वाशरी के परिचालन पर जोर देते हुए संयुक्त सचिव श्री पाती ने कहा कि इसके परिचालन पर विशेष ध्यान देने की बात कही है. कहा कि वर्तमान में वाशरियां क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही है. उन्होंने कंपनी के विभिन्न वाशरियों में पड़े स्टॉक और रिजेक्ट कोल को चालू वित्तीय वर्ष में डिस्पैच करने पर जोर दिया है.
सुपरविजन की कमी
सीएमडी को लिखे अपने पत्र में संयुक्त सचिव श्री पाती ने कहा कि बीसीसीएल के क्षेत्र में पदस्थापित अधिकारियों के सुपरविजन सही नहीं है. साथ ही, जो स्थानीय मुद्दे हैं उनके निबटारा करने में वह पूरी तरह से विफल है. स्थानीय मुद्दों के निबटारे में स्थानीय प्रबंधक को ध्यान देने की आवश्यकता है.
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