20 को ही थी रंजीत सिंह की हत्या की योजना, रास्ता बदल लेने से बच गये थे

Updated at : 28 Aug 2018 7:20 AM (IST)
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20 को ही थी रंजीत सिंह की हत्या की योजना, रास्ता बदल लेने से बच गये थे

धनबाद : झावियुमो जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह की हत्या एक दिन पूर्व 20 अगस्त को ही हो जाती. मगर रास्ता बदल लेने के कारण जान बच गयी. हत्या के चार दिन पूर्व से ही शूटर उनकी रेकी कर रहे थे. पंकज यादव लगातार उनकी रेकी में लगा था. सभी शूटर के साथ वह फोन पर संपर्क […]

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धनबाद : झावियुमो जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह की हत्या एक दिन पूर्व 20 अगस्त को ही हो जाती. मगर रास्ता बदल लेने के कारण जान बच गयी. हत्या के चार दिन पूर्व से ही शूटर उनकी रेकी कर रहे थे. पंकज यादव लगातार उनकी रेकी में लगा था. सभी शूटर के साथ वह फोन पर संपर्क में था. 20 अगस्त को रंजीत सिंह भूली के रास्ते से चले गये थे. शूटर कुसुंडा फाटक के पास खड़े रह गये. एसएसपी ने बताया कि 20 अगस्त को हत्या की प्लानिंग फेल हो जाने के कारण जेल में बंद प्रिंस खान और बिट्टू रवानी काफी झुंझला उठे.
अगले दिन सवेरे से रंजीत सिंह पर नजर रखी गयी. यह काम भी पंकज यादव ने किया. एसएसपी से मिलने से लेकर उनके बीकेबी साइडिंग तक पंकज बाइक से रंजीत सिंह के पीछे रहा. अगले दिन यह तय कर लिया गया था कि किसी हाल में आज रंजीत सिंह की हत्या कर देनी है. एसएसपी के अनुसार उस दिन अगर रंजीत भूली के रास्ते भी जाते तो उनकी हत्या तय थी. कुसुंडा फाटक पार करते ही गोंदुडीह थाना क्षेत्र में रंजीत पर पांच गोलियां चलायी गयी, जिसमें जिसमें शमशाद उर्फ विक्की ने तीन और औरंगजेब ने दो गोलियां मारीं. हथियार वासेपुर के मो. साजिद ने उपलब्ध कराये.
पंकज व विजय से जेल में हुआ था प्रिंस का परिचय : गोंदुडीह के पंकज यादव व विजय यादव मारपीट समेत अन्य आरोपों में धनबाद जेल में बंद थे. इसी दौरान प्रिंस खान से परिचय हुआ था. प्रिंस के संपर्क में आने के बाद दोनों में बातचीत होती थी. प्रिंस ने दोनों को रंजीत की गतिविधियों की निगरानी रखने व रेकी करने की जिम्मेदारी दी थी.
रंगदारी के लिए की गयी हत्या
एसएसपी मनोज रतन चोथे ने बताया रंजीत की हत्या रंगदारी के लिए की गयी है. जेल में बंद प्रिंस खान रंजीत से पांच रुपये प्रति टन रंगदारी मांग रहा था. वरुण ने जेल में बंद प्रिंस खान से रंजीत की दो-दो बार बात करायी थी. बात नहीं बन पायी थी. इसके बाद हत्या की योजना बनायी गयी. पंकज को रंजीत की रेकी करने को कहा गया. तीन-चार दिनों तक पंकज यादव व विजय यादव उर्फ नीरज यादव (गोंदुडीह) रंजीत की रेकी करते रहे. रंजीत के कुसुंडा साइडिंग आने व जाने की जानकारी देते रहे.
पंकज की सूचना पर औरंगजेब व विक्की ने 21 अगस्त को हत्या की योजना बनायी. वरुण व विजय बाइक चला रहा था. एक बाइक पर विक्की तो दूसरे पर औरंगजेब था. औरंगजेब ने तीन व विक्की ने दो गोली मारी थी. इसके बाद ट्रेन से आसनसोल होते हुए दोनों कोलकाता पहुंचे और हवाई जहाज से मुंबई भाग गये.
कांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम के अफसर
मुकेश कुमार डीएसपी (विधि-व्यवस्था), मो शमीम अहमद खान बैंक मोड़ थानेदार, रणधीर सिंह थाना प्रभारी झरिया, सरेंद्र सिंह पुलिस निरीक्षक केंदुआडीह अंचल, दिनेश कुमार बरवाअड्डा थाना प्रभारी, अमित कुमार लोयाबाद थाना प्रभारी, प्रवीण कुमार भूली ओपी प्रभारी, गजेंद्र कुमार पांडेय बरोरा थाना प्रभारी, एसओजी टीम के साथ सशस्त्र बल.
जेल से फोन पर हत्या की प्लानिंग शर्मनाक जांच की जायेगी : एसएसपी
प्रिंस खान का खास आदमी है औरंगजेब. उसके घर के काम से लेकर रंगदारी मांगना, लाइजनिंग करने का काम भी औरंगजेब करता था. रंजीत से औरंगजेब व शमशाद पूर्व में भी प्रिंस खान के लिए रंगदारी मांग चुके थे. फोन पर रंजीत की बात भी प्रिंस से करायी गयी थी. जब रंजीत पैसे देने के लिए तैयार नहीं हुए तो प्रिंस खान ने जेल के अंदर से ही फोन पर औरंगजेब को रंजीत की हत्या करने को कहा. उसके बाद से औरंगजेब ने शमशाद और बाकी लोगों को तैयार किया.
एसएसपी ने बताया कि जेल में फोन से ही हत्या की प्लानिंग हो जाना बहुत ही शर्मनाक बात है. इसकी भी जांच की जायेगी. एसएसपी ने बताया कि रंजीत सिंह की हत्या के दौरान जांच में भूली के मो. नौशाद नामक एक शख्स को पकड़ा गया था. हालांकि वह किसी भी प्रकार से इस हत्या में शामिल नहीं था. उसके पास से तीन मैगजीन व 13 राउंड गोली मिली थी. पुलिस ने उसे आर्म्स एक्ट के तहत जेल भेज दिया है.
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