सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक में नहीं देना होगा प्रोसेसिंग चार्ज
Updated at : 10 Jul 2018 4:50 AM (IST)
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धनबाद : अब सरकारी ब्लड बैंकों में मरीजों को ब्लड के लिए प्रोसेसिंग चार्ज नहीं देना होगा. मरीजों व उनके परिजनों को होने वाली भारी परेशानी को देखते हुए सरकार ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है. पीएमसीएच सहित राज्य के सभी सरकारी अस्पताल अब मरीजों से खून के लिए प्रोसेसिंग चार्ज नहीं लेंगे. राष्ट्रीय ग्रामीण […]
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धनबाद : अब सरकारी ब्लड बैंकों में मरीजों को ब्लड के लिए प्रोसेसिंग चार्ज नहीं देना होगा. मरीजों व उनके परिजनों को होने वाली भारी परेशानी को देखते हुए सरकार ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है. पीएमसीएच सहित राज्य के सभी सरकारी अस्पताल अब मरीजों से खून के लिए प्रोसेसिंग चार्ज नहीं लेंगे. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के निदेशक केएन झा ने सूबे के सभी मेडिकल कॉलेज व सरकारी अस्पतालों को पत्र लिखकर प्रोसेसिंग चार्ज नहीं लेने का आदेश दिया है.
वैसे यह निर्णय सरकार ने अप्रैल 2018 में ही ले लिया था. अभी तक प्रोसेसिंग चार्ज के रूप में मरीजों से 350 रुपया लिया जाता था. पीएमसीएच में भी गरीब मरीजों से पैसे लिये जाते थे. कई बार प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर मनमानी वसूली भी होती थी. अब सरकार के फैसले से तमाम लोगों को राहत मिलेगी. प्रोसेसिंग चार्ज को लेकर लंबे समय से लोग विरोध करते आ रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि पीएमसीएच में हर दिन 40-50 यूनिट खून जरूरतमंदों को दिये जाते हैं.
दुर्घटनाग्रस्त लोग उठाते थे परेशानी: पीएमसीएच में अधिकांशत: गरीब मरीज आते हैं. कई ऐसे मरीज भी होते हैं, जिनके पास फूटी कौड़ी नहीं होती है. ऐसे मरीजों से खून देने के बदले प्रोसेसिंग चार्ज के 350 रुपये मांगे जाते थे. गरीब मरीज के लिए यह बड़ा बोझ था. सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को भी तत्काल ब्लड की जरूरत होती है. प्रोसेसिंग चार्ज नहीं मिलने के कारण कई बार समय पर ऐसे लोगों को ब्लड उपलब्ध नहीं हो पाता था. तब प्रोसेसिंग चार्ज की माफी के लिए गरीब मरीजों को पीएमसीएच के अधीक्षक को पत्र लिखना पड़ता था. अधीक्षक की अनुमति के बाद ही चार्ज माफ किया जाता था. कई बार मरीजों व ब्लड बैंक कर्मियों के बीच हो-हंगामा भी हो चुका है.
नाको के निर्देश पर सरकार रेस : नेशनल एड्स कंट्रोल सोसाइटी (नाको) के तहत ही राज्य में ब्लड बैंक चल रहे हैं. प्रोसेसिंग चार्ज पर लोगों को यह लगता था कि सरकार खून मुहैया कराने के नाम पर पैसा लेती है. सरकार का यह मानना है कि सरकारी ब्लड बैंक में खून स्वैच्छिक रक्तदान से आता है, इसलिए इस पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं होना चाहिए. स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को झुकाव होगा, तो गरीब मरीजों को राहत भी मिलेगी.
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