देवघर : कानून को धता बताकर हो रहा वाहनों का मॉडिफिकेशन, लोगों की बढ़ रही परेशानी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों के मुताबिक व्हीकल के बेसिक स्ट्रक्चर से छेड़छाड़ करना कानून का उल्लंघन है. कोर्ट के मुताबिक अगर किसी वाहनों में नियमों का उल्लंघन कर मोडिफिकेशन कराया जाता है तो उसका रजिस्ट्रेशन तक रद्द हो सकता है.
देवघर : सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यातायात विभाग व पुलिस प्रशासन हेलमेट चेकिंग के साथ-साथ सीट बेल्ट जांच और लाइसेंस आदि की जांच के लिए अभियान चला रहा है, मगर हादसों के दूसरे कारणों के तकनीकी पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. आज भी ऐसी कई वजहें हैं, जिनसे दुर्घटनाएं भी हो रही हैं, पर उनके कारणों का पता नहीं चल पाता है. जिले में बाइक से लेकर भारी वाहनों की एक बड़ी तादाद है, जिनके अपने मूल रूप से छेड़छाड़ कर नियमों का उल्लंघन करते हुए चलाया जा रहा है. इन वाहनों के चालक सड़क पर तो अपनी सहूलियत के लिए वाहन दौड़ा रहे हैं, मगर इनके कारण दूसरे वाहन चालकों व राहगीरों की परेशानी बढ़ जा रही है. लोग अपने रसूख या दबंगई दिखाने के लिए बाइकों में तेज आवाज वाले साइलेंसर लगाकर सड़कों पर चला रहे हैं. वहीं, बाइक से लेकर भारी वाहनों में अलग से सफेद एलइडी या रंग-बिरंगी लाइटें लगाकर चलायी जाती हैं, जो दूसरे चालकों के लिए मुसीबत बनती जा रही है. अतिरिक्त लाइट्स लगाने के बाद इनके रिफ्लेक्शन से कई बार दूसरे चालक चकमा खा जाते हैं, जिनसे दुर्घटनाएं भी हाे जाती हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों के मुताबिक व्हीकल के बेसिक स्ट्रक्चर से छेड़छाड़ करना कानून का उल्लंघन है. कोर्ट के मुताबिक अगर किसी वाहनों में नियमों का उल्लंघन कर मोडिफिकेशन कराया जाता है तो उसका रजिस्ट्रेशन तक रद्द हो सकता है. यह नियम सभी वाहनों कार, बाइक, बस और ट्रक पर लागू होता है. नियम के तहत कार या बाइक में एक्सटीरियर या इंजन के साथ किसी प्रकार का मोडिफिकेशन गैर कानूनी है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मोटर व्हील एक्ट की धारा 52(1) के मुताबिक वाहन निर्माता की तरफ से दिये जाने वाले वाले मूल स्पेसिफिकेशन को बनाये रखना जरूरी है.
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नियम के अनुसार बाइक या कार में रंग में छोटे-मोटे बदलाव या कोई अलग से छोटे-मोटे फिटमेंट ही करा सकते हैं,लेकिन बॉडी या चैचिस के साथ कोई स्ट्रक्चरल बदलाव या फिर बैटरी, सीएनजी, सोलर पॉवर या एलपीजी पर वाहन चलाना या फिर किसी प्रकार की कन्वर्जन किट लगाना नियम के खिलाफ है. इसके लिए आरटीओ की परमिशन लेनी जरूरी है, अन्यथा रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जा सकता है. वाहनों में ये बदलाव हैं गैर-कानूनी, कट सकता है भारी-भरकम चालान या लाइसेंस भी हो सकता है रद्द.
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कलरफुल ग्लास: गाड़ी के शीशों का कलर चेंज करवाना या इनपर किसी प्रकार रैप लगवाना यातायात नियमों का उल्लंघन माना जाता है. कार के रियर ग्लास की दृश्यता कम से कम 75 फीसदी और साइड विंडो की 50 फीसदी होनी चाहिए.
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फैंसी हाॅर्न: बाइक से लेकर भारी वाहनों के हॉर्न से छेड़छाड़, कानों पर असर डालने वाले हॉर्न, प्रेशर हॉर्न या फैंसी सायरन लगवाना अवैध मोडिफिकेशन है, जिस पर चालान कट सकता है.
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तेज आवाज वाले साइलेंसर: टू-व्हीलर या कारों में तेज आवाज वाले साइलेंसर लगाना गैर-कानूनी है. इसे लगाने पर मोटा चालान कट सकता है और गाड़ी तक जब्त हो सकती है.
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टायरों में बदलाव: ऑरिजनल टायर की जगह ज्यादा चौड़े या हाई कैपेसिटी के टायर लगाना भी निमयों का उल्लंघन है. नियमानुसार यह अल्टरेशन भी गैर-कानूनी है. वाहन निर्माता कुछ विशेष परिस्थितियों में टेस्टिंग करते हैं, जिनमें सेफ्टी और सिक्योरिटी स्टैंडर्ड भी शामिल होते हैं.
देवघर जिला परिवहन पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार रजक ने कहा कि वाहनों में मोडिफिकेशन करना कानूनन अपराध है. अलग से लाइटें आदि नहीं लगा सकते हैं. वाहनों में किसी तरह के बदलाव के लिए संबंधित परिवहन कार्यालय में आवेदन देना होगा. परमिशन के बाद ही कोई बदलाव कराना है. मॉडिफिकेशन कराने वाले पर कार्रवाई होगी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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