जसीडीह बाइपास रेल परियोजना अंतिम चरण में, दुमका व गोड्डा के लिए इंजन बदलने की समस्या होगी खत्म

Published by : RAJIV RANJAN Updated At : 02 Jun 2026 8:52 PM

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पूर्व रेलवे की जसीडीह बाइपास लाइन परियोजना अंतिम चरण में पहुंच गयी है. करीब 293 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना का 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है.

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संवाददाता, देवघर. पूर्व रेलवे अंतर्गत जसीडीह बाइपास लाइन परियोजना अंतिम चरण में पहुंच गयी है. करीब 293 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना का 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार परियोजना पूरी होने के बाद दुमका और गोड्डा की ओर जाने वाली मेल, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को जसीडीह स्टेशन पर इंजन को बदलने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे यात्रा के समय में कमी आयेगी और परिचालन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी.

पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देउस्कर के नेतृत्व में संचालित इस परियोजना का उद्देश्य जसीडीह स्टेशन पर ट्रेनों के इंजन बदलने की समस्या को समाप्त करना है. परियोजना के तहत कुमड़ाबाद रोहिणी और देवघर के बीच सीधा संपर्क स्थापित किये जाने का रूट तैयार हो रहा है, जिससे ट्रेनों को जसीडीह स्टेशन में प्रवेश किये बिना आगे बढ़ने की सुविधा मिलेगी.

इंजन बदलने की प्रक्रिया में लगता है काफी समय

वर्तमान में दुमका और गोड्डा की ओर जाने वाली मेल, एक्सप्रेस व मालगाड़ियों को जसीडीह स्टेशन पर इंजन बदलने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. इसमें इंजन को ट्रेन से अलग कर दूसरे छोर पर जोड़ा जाता है और आवश्यक तकनीकी परीक्षण के बाद ट्रेन आगे बढ़ती है. इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है, जिससे यात्रियों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है, साथ ही प्लेटफॉर्म पर पहले से अन्य ट्रेन होने के कारण दूसरी ट्रेनों के परिचालन पर भी प्रभाव पड़ता है. वहीं अन्य ट्रैक पर भी ट्रेन होने पर मालगाड़ियों की आवाजाही धीमी हो जाती है.

पांच सवारी ट्रेनों व दो मालगाड़ियों का समय बचेगा

रेलवे के अनुसार बाइपास लाइन के चालू होने के बाद दुमका और गोड्डा रूट की ट्रेनों के लिए इंजन बदलने की प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो जायेगी. इससे प्रतिदिन कम से कम पांच यात्री ट्रेनों और दो प्रमुख मालगाड़ियों को लाभ मिलेगा. मिली जानकारी के अनुसार चट्टानों की कटिंग, रोड अंडर ब्रिज, रोड ओवर ब्रिज और छोटे पुलों का निर्माण पूरा कर लिया गया है. आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली की तैयारी भी पूरी हो चुकी है.

क्या कहते हैं अधिकारी

पूर्व रेलवे के सीपीआरओ शिवराम मांझी ने बताया कि जुलाई तक परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद क्षेत्र में रेल परिचालन की गति और दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा.

शिवराम मांझी, सीपीआरओ, पूर्व रेलवेB

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