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सिदो-कान्हू के बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता : अध्यक्ष

Updated at : 30 Jun 2025 9:26 PM (IST)
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सिदो-कान्हू के बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता : अध्यक्ष

हूल दिवस पर सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर किया गया माल्यार्पण

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मारगोमुंडा. प्रखंड क्षेत्र के सालमंन्द्रा व बलवा चौक पर हूल दिवस पर सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष सोहन मुर्मू व अकदस हसन ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया. मौके पर बीस सूत्री अध्यक्ष ने कहा कि हूल दिवस 30 जून 1855 को सिदो-कान्हू और चांद-भैरव के नेतृत्व में साहिबगंज के भोगनाडीह में लगभग 50 हजार आदिवासियों ने अंग्रेजी शासन के अधीन महाजनी प्रथा व बंदोबस्ती नीति के खिलाफ जंग का ऐलान किया था. तब 1855 को संथाल विद्रोह ने अंग्रेजी शासन की नींव हिलाकर रख दी थी. जिससे अंग्रेजों के छक्के छूट गए थे. कहा इस दिन अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले आदिवासियों की शौर्य गाथा और बलिदान को याद किया जाता है. सिदो-कान्हू हमें अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देते है. सिदो-कान्हू चांद भैरव फूलो झानो के पद चिह्न पर चलने की जरूरत है. कहा कि सालमांद्रा गांव से शिबू सोरेन ने महाजनी प्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद किया था. उक्त गांव से झारखंड आंदोलन की शुरुआत की गयी थी. उक्त गांव शिबू सोरेन व स्वर्गीय हाजी हुसैन अंसारी का कर्म क्षेत्र रहा है. मौके पर झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य डुगु टुडू, मुखिया सुधीर मंडल, मोरीफ खान, मो.शमीम, महबूब अंसारी, सुनील मुर्मू, छोटु किस्कू, जयनारायण मंडल, कृष्ण हेमब्रम, शशि शरण, रमेश शाह, नदीम आलम, चंदलाल सोरेन आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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