मिथिलांचल का महापर्व मधुश्रावणी आज से
Updated at : 22 Jul 2019 6:48 AM (IST)
विज्ञापन

सारवां : मिथिलांचल का महापर्व मधुश्रावणी 22 जुलाई से तीन अगस्त तक मनाया जायेगा. इस दौरान नवविवाहिता पति की लंबी आयु के लिए भगवान शिव, गौरी और नाग की पूजा करती हैं. ऐसी मान्यता है कि सबसे पहले माता पार्वती के द्वारा मधुश्रावणी व्रत रखा गया था. जिसके कारण जन्म जन्मांतर तक भगवान शिव को […]
विज्ञापन
सारवां : मिथिलांचल का महापर्व मधुश्रावणी 22 जुलाई से तीन अगस्त तक मनाया जायेगा. इस दौरान नवविवाहिता पति की लंबी आयु के लिए भगवान शिव, गौरी और नाग की पूजा करती हैं. ऐसी मान्यता है कि सबसे पहले माता पार्वती के द्वारा मधुश्रावणी व्रत रखा गया था. जिसके कारण जन्म जन्मांतर तक भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करती रही.
इसे मिथिला समाज के लोग एक तपस्या के रूप में मनाते हैं. जिसमें तेरह दिनों तक पूरे संयम एवं निष्ठा के साथ देवाधिदेव भगवान शिव व माता गौरी का आवाहन कर मैना पात पर नाग नागिन की आकृति बना कर व्रत का शुभारंभ करती है.
इस अवसर पर पंचमी, मंगला गौरी, पृथ्वी जन्म, पतिव्रता के महत्व, माता गौरी व भगवान शिव की कथा, माता गौरी की तपस्या, शिव विवाह, माता गंगा की कथा, बिहूला वसंत व बाल वसंत कथा का श्रवण करती हैं एवं सुहाग गीत का श्रवण किया जाता है .
समाप्ति के दिन ससुराल से आये पूजन सामग्री के साथ दूध लावा की प्रधानता होती है. 14 वें दिन बड़े बरतन में दही फल व मिठाई को सजा कर पूजन करती है एवं चौदह सुहागनों के बीच प्रसाद नवविवाहिता वितरण करती है. मधुश्रावणी व्रत में भाई का विशेष महत्व होता हैं
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




