स्वच्छ पानी आपूर्ति के नाम पर स्वास्थ्य से किया जा रहा खिलवाड़
Updated at : 25 Mar 2019 6:00 AM (IST)
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मधुपुर : घर-घर तक आरओ युक्त पानी पहुंचाने के नाम पर शहर के विभिन्न मोहल्लों में आधा दर्जन से अधिक पानी का उद्योग का धंधा नियमों को ताक पर रख कर चलाये जा रहे है. पानी आपूर्ति के नाम पर कई आपूर्तिकर्ता लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है. 20 लीटर के जार […]
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मधुपुर : घर-घर तक आरओ युक्त पानी पहुंचाने के नाम पर शहर के विभिन्न मोहल्लों में आधा दर्जन से अधिक पानी का उद्योग का धंधा नियमों को ताक पर रख कर चलाये जा रहे है. पानी आपूर्ति के नाम पर कई आपूर्तिकर्ता लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है.
20 लीटर के जार में बेचा जाने वाला अधिकतर पानी किसी भी मानक पर खरा नहीं उतर रहा है. पानी के जार में विभिन्न कंपनियों का स्टीकर लगा कर पानी बेचा जा रहा है. लेकिन जार में पानी भरने की तिथि व एक्सपायरी की तिथि आदि कोई भी सूचना अंकित नहीं रहता है.
इतना ही नहीं पानी के जार को भी बिना साफ किये पुन: पानी रिफलिंग कर लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है. कई ऐसे जगह जहां पानी का उद्योग चला रहे हैं जो नल के पानी में क्लोरिन नामक टेबलेट मिला कर उसे घरों तक पहुंचाते है.
क्लोरिन के मिलाने से पानी साफ हो जाता है और इसका स्वाद बदल जाता है. नगर पर्षद या संबंधित महकमा की ओर से पानी की सैंपलिंग आज तक कभी नहीं हुई है. पानी बेचने वाले इन प्लांटों का निरीक्षण भी नहीं हुआ है.
कुछ को छोड़ कर शहर में मौजूद अधिकांश प्लांट ट्रेड लाइसेंस के नाम पर चल रहा है. पानी के कारोबारी द्वारा दुकान, अस्पताल, बैंक, सरकारी कार्यालय, शादी विवाह व अन्य समारोह में अधिकतर जगह सादे जार में भरा पानी भरकर आपूर्ति की जाती है. इसके अलावे कई घरों में भी पानी का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन क्या यह पानी शुद्ध है.
इसकी जांच का फिक्र किसी को नहीं है. मधुपुर में नगर पर्षद क्षेत्र में आम लोगों को शुद्ध पानी की सप्लाई का नगर पर्षद के पास कोई व्यवस्था नहीं रहने के कारण लोगों को बेबस होकर पानी खरीद कर पीने को विवश है. प्रशासन भी इसकी जांच नहीं कर रहा है.
कहते हैं डीएस सह खाद्य निरीक्षक
खाद सुरक्षा पदाधिकारी डॉ. सुनील मरांडी ने कहा कि मधुपुर में कितने पानी आपूर्ति कर्ता के पास लाइसेंस है. इसकी सूचना उन्हें किसी भी स्तर से नहीं दिया गया है. लेकिन क्लोरिन टेबलेट युक्त पानी पीने से लोगों को काफी नुकसान हो सकता है. अधिक क्लोरिन टेबलेट मिलाये जाने से त्वचा, आंख, सांस लेने व नाखून में तरह-तरह के विकार हो सकते हैं.
कहते हैं एसडीओ सह खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी
योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि कितने लोग पानी का प्लांट चला रहे हैं. इसकी सूचना नहीं है. लेकिन उनके स्तर से पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जायेगा. अगर उसमें गड़बड़ी पायी गयी तो प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा. पानी का अवैध कारोबार करने वालों पर भी कार्रवाई होगी. चुंकि यह लोगों के स्वास्थ्य से सीधा जुड़ा हुआ मामला है.
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