डायन कुप्रथा के खिलाफ लड़कर छोटनी ने बनायी पहचान

Updated at : 30 Aug 2018 5:01 AM (IST)
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डायन कुप्रथा के खिलाफ लड़कर छोटनी ने बनायी पहचान

अबतक सौ से अधिक महिलाओं को डायन प्रथा के चंगुल से निकाला झारखंड व राजस्थान सरकार से मिल चुका है सम्मान देवघर : कभी एक तांत्रिक के कहने पर 41 साल की उम्र में जमशेदपुर की रहने वाली छोटनी महतो को ग्रामीणों ने डायन मान लिया था. उन्हें मैला पिलाने की कोशिश की गयी. लेकिन, […]

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अबतक सौ से अधिक महिलाओं को डायन प्रथा के चंगुल से निकाला

झारखंड व राजस्थान सरकार से मिल चुका है सम्मान
देवघर : कभी एक तांत्रिक के कहने पर 41 साल की उम्र में जमशेदपुर की रहने वाली छोटनी महतो को ग्रामीणों ने डायन मान लिया था. उन्हें मैला पिलाने की कोशिश की गयी. लेकिन, जब छोटनी की हत्या की साजिश लोगों ने रची तो एक उम्मीद पति पर जगी थी. लेकिन, समाज के आगे झुककर पति धनंजय महतो ने भी साथ नहीं दिया. तब अपने चार छोटे बच्चों को छोड़कर छोटनी महतो करीब एक साल तक जंगल में रही. इस बीच पति ने भी इनको छोड़ दिया. इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी व डायन कुप्रथा खिलाफ अभियान चलाने की ठान ली. 1997 में वह डायन कुप्रथा के खिलाफ काम करने वाली संस्था आजाना से जुड़कर काम करना शुरू कर दिया.
बुधवार को बाबा मंदिर पूजा करने पहुंची 64 वर्षीय छोटनी महतो आज भी वह दिन याद कर कांप उठती है. पूरी घटना बयां करते हुए उनके चेहरे पर वह दर्द देखा गया जो आज भी सभ्य कहे जाने वाले समाज में औरतों के खिलाफ ऐसी घटनाओं पर आवाज नहीं उठा पाता.
दो बेटे सहित बहू को पढ़ा लिखाकर समाज को दिया जवाब : जहां खुद मेहनत करने के साथ साथ लगातार संघर्ष करते हुए बाहर रहने के बावजूद अपने चारों बच्चों को ग्रेजुएट कराने के अलावे अपने छोटे बेटे को बीएड करा कर समाज को जवाब दिया. यही नहीं दो बेटे की शादी हो चुकी है. एक बहू घर आयी तो उसे भी आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया. बहू को भी एमए तक पढ़ाया है. अब बच्चे कमाने लगे हैं, तो घर की चिंता पूरी तरह से खत्म हो गयी है. छोटनी कहती है जबतक उनके शरीर में जान रहेगा वह इस कुप्रथा के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी.
अबतक सौ से अधिक महिलाओं को इस चंगुल से निकाला बाहर
छोटनी बताती है एनजीओ से जुड़ने के बाद अबतक इस कुप्रथा में फंसी करीब सौ महिलाओं को बाहर निकाल चुकी है. 75 महिलाओं की तो जान बचायी गयी है. वर्तमान में खुद की रोशनी नाम का एनजीओ भी बनाया. इसके अलावा आशा संस्था के लिये भी काम कर रही हूं. किसी संस्था के बुलावे पर वह जाने को तैयार रहती है ताकि, औरतों को इस सामाजिक अभिशाप का शिकार बनाने से बचाया जा सके.
झारखंड व राजस्थान के
सीएम ने किया सम्मानित
छोटनी ने बताया कि उनके काम को देखकर झारखंड के तत्कालीन सीएम अर्जुन मुंडा व राजस्थान में वहां की सीएम वसुंधरा राजे के हाथों सम्मानित भी किया गया है. इस कुप्रथा के खिलाफ होने वाले सेमिनार में भाग लेने के लिए झारखंड के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश व बंगाल आदि राज्य जाने का मौका मिला है. कई सेमिनार में व्याख्यान के लिए छोटनी महतो को सम्मान भी
मिल चुका है.
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