24.46 करोड़ आइटीसी हेराफेरी की एफआइआर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Jun 2018 9:44 AM

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राज्य कर पदाधिकारी विशाल लकड़ा ने नगर थाने में दर्ज कराया मामला सर्वश्री साहा इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर मोती साव व बृजबिहारी लेन निवासी मकान मालिक सुनील पांडेय को बनाया गया आरोपित देवघर : देवघर अंचल के राज्य कर पदाधिकारी विशाल लकड़ा ने बृजबिहारी लेन के पते पर रजिस्टर्ड सर्वश्री साहा इंटरप्राइजेज के विरुद्ध 24 करोड़ […]

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राज्य कर पदाधिकारी विशाल लकड़ा ने नगर थाने में दर्ज कराया मामला
सर्वश्री साहा इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर मोती साव व बृजबिहारी लेन निवासी मकान मालिक सुनील पांडेय को बनाया गया आरोपित
देवघर : देवघर अंचल के राज्य कर पदाधिकारी विशाल लकड़ा ने बृजबिहारी लेन के पते पर रजिस्टर्ड सर्वश्री साहा इंटरप्राइजेज के विरुद्ध 24 करोड़ 46 लाख 47 हजार 612 रुपये आइटीसी हेराफेरी करने की एफआइआर दर्ज करायी है.
कंपनी के प्रोपराइटर मोती साव समेत मकान मालिक बृजबिहारी लेन निवासी सुनील पांडेय को आरोपित बनाया है. जिक्र है कि व्यावसायिक प्रतिष्ठान का निरीक्षण अंचल एवं अन्वेषण ब्यूरो संताल परगना प्रमंडल दुमका के पदाधिकारियों द्वारा किया गया. सर्वश्री साहा इंटरप्राइजेज के निबंधन प्रमाणपत्र में अंकित व्यवसाय स्थल बृजबिहारी लेन देवघर जाने पर पता चला कि इस नाम का व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं है.
इसके बाद व्यवसायी के जीएसटी रजिस्ट्रेशन में दिये गये मोबाइल नंबर 8017745404 से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो स्वीच ऑफ मिला. बृजबिहारी लेन स्थित सर्वश्री बाबा ट्रेडिंग व अन्य व्यवसायियों से पूछताछ करने पर उनलोगों ने भी सर्वश्री साहा इंटरप्राइजेज व उसके प्रोपराइटर मोती साव पिता दुर्गा साव के बारे में अनभिज्ञता जतायी. उनलोगों ने बताया बृजबिहारी लेन में इस नाम का कोई प्रतिष्ठान व उसके प्रोपराइटर मोती साव नहीं हैं.
व्यवसायी ने जीएसटी के रजिस्ट्रेशन में दिये गये रेंट रजिस्ट्रेशन के प्रथम पृष्ठ में दर्शाया गया कि सुनील पांडेय पिता मनोज पांडेय के मकान में यह प्रतिष्ठान चलता है. किंतु छानबीन व पूछताछ में पता चला कि सुनील पांडेय नाम का कोई व्यक्ति नहीं है. बंपास टाउन कालीबाड़ी के आवासीय पते पर भी पहुंचकर पूछताछ किया गया, किंतु मोती साव पिता दुर्गा साव के बारे में कुछ पता नहीं चल सका.
कार्यालय अभिलेख से पता चला कि प्रतिष्ठान की प्रथम करदेयता 12 जून 2015 है, जो व्यवसायी ने जीएसटी में माइग्रेट किया है. वैट निबंधन के समय बंधपत्र में 10000 रुपये का एनएससी दाखिल किया था. उसके सीजीएसटी में 12 करोड़ 23 लाख 23 हजार 806 रुपये व एसजीएसटी में 12 करोड़ 23 लाख 23 हजार 806 रुपये कुल 24 करोड़ 46 लाख 47 हजार 612 रुपये आइटीसी का दावा किया गया था, जिसे व्यवसायी ने 09 नवंबर 2017 और 09 जनवरी 2018 को उपभोग कर लिया है. 09 जनवरी 2018 से इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में शून्य आइटीसी दर्शाया जा रहा है.
इस अवधि में व्यवसायी ने राजस्व की क्षति पहुंचायी. व्यवसायी ने सितंबर में जीएसटीआर-1 दाखिल किया गया है. जीएसटीआर-1 की जांच करने पर पता चला कि व्यवसायी ने अगस्त 2017 में हावड़ा स्थित सर्वश्री मसाका ट्रेडिंग प्रा लि को 53 करोड़ 34 लाख 62 हजार 947 रुपये 33 पैसे का विक्रय किया. सितंबर में सर्वश्री वलेसका ट्रेडिंग प्रा लि हावड़ा को एक अरब सात करोड़ 97 लाख 37 हजार 812 रुपये 18 पैसे का विक्रय दर्शाया है.
व्यवसायी के जीएसटीआर-2 के जांच में पाया गया कि अगस्तमें सर्वश्री ओम ट्रेडिंग देवघर से 53 करोड़ 34 लाख 62 हजार 947 रुपये 33 पैसे की खरीदारी दर्शायी है. सितंबर में सर्वश्री भूतनाथ इंटरप्राइजेज धनबाद से एक अरब सात करोड़ 95 लाख 93 हजार 853 रुपये 40 पैसे का क्रय किया गया है, जो प्रथम द्रष्टया संदेहास्पद प्रतीत होता है. माह सितंबर के पश्चात कोई विवरणी दाखिल नहीं किया गया है.
सर्वश्री साहा इंटरप्राइजेज के प्रोपरायटर मोती साव द्वारा अपराधिक षड़यंत्र कर जाली कागजातों के आधार पर फर्जी कंपनी निबंधन कराया और अन्य प्रतिष्ठानों व व्यवसायियों के साथ मिलकर जाली कागजातों के सहारे 24, 46, 47, 612 रुपये आइटीसी का दावा कर छल पूर्वक उपभोग कर लिया. समाचार लिखे जाने तक नगर थाने में मामला दर्ज कर आइओ एसआइ दिलीप दास को बनाया गया है.
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